शेयर बाजार में कमजोरी: आईटी सेक्टर पर सबसे बड़ा दबाव, एफपीआई बिकवाली से बढ़ी चिंता
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लाल निशान के साथ शुरुआत की। वैश्विक संकेतों की कमजोरी और अमेरिका की नई H-1B वीज़ा नीति को लेकर बने संशय ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला।
बीएसई सेंसेक्स लगभग 81,729 अंकों पर आ गया, जिसमें करीब 0.45% की गिरावट रही। एनएसई निफ्टी 50 भी 0.43% फिसलकर 25,057 अंक के स्तर पर कारोबार करता दिखा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोर रहे और गिरावट का रुझान बनाए रखा।
आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज हुई। निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 0.9% टूट गया। इसके अलावा ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर भी दबाव में रहे। हालांकि, पब्लिक सेक्टर बैंकों के शेयरों ने हल्की मजबूती दिखाई और कुछ हद तक बाजार को सहारा दिया।
गिरावट की बड़ी वजहें
एफपीआई बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इसका दबाव गुरुवार को भी देखने को मिला।
अमेरिकी वीज़ा नीति: अमेरिका में H-1B वीज़ा शुल्क में वृद्धि और चयन प्रक्रिया में बदलाव की घोषणाओं से आईटी सेक्टर को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
वैश्विक आर्थिक दबाव: डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में मंदी जैसे हालात भारतीय बाजार पर भी असर डाल रहे हैं।
तकनीकी कमजोरी: निफ्टी के तकनीकी चार्ट पर नकारात्मक संकेत दिखे हैं, जिससे सपोर्ट स्तरों की ओर झुकाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। आईटी और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना निवेशकों के लिए अहम होगा। वहीं, बैंकिंग और पब्लिक सेक्टर के शेयर थोड़ी स्थिरता दे सकते हैं।