यह कौनसी शिक्षा है जो बच्चों के हाथ में कंप्यूटर नहीं बम देती है- योगेंद्र उपाध्याय

बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शिक्षा की दिशा और दशा पर गहन मंथन करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य मानवता की रक्षा है, न कि दानवता का प्रसार।

Nov 13, 2025 - 21:25
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यह कौनसी शिक्षा है जो बच्चों के हाथ में कंप्यूटर नहीं बम देती है- योगेंद्र उपाध्याय
रुहेलखंड विवि के दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद संस्कारयुक्त शिक्षा के पक्षधर थे। जिस शिक्षा से मनुष्य में विवेक और सेवा की भावना विकसित होती है, वही सच्ची शिक्षा है। कोरोना काल में डॉक्टरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना समाज की रक्षा की, वह वास्तविक शिक्षा का सर्वोत्तम उदाहरण है।

मंत्री उपाध्याय ने सवाल उठाते हुए कहा कि वो कौनसी शिक्षा है जो डॉक्टरों को आतंकी बनाती है? वो कौनसी शिक्षा है जो बच्चों के हाथ में कलम नहीं, पत्थर देती है? और वो कौनसी शिक्षा है जो बच्चों के हाथ में कंप्यूटर नहीं, बम देती है?

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज ऐसी शिक्षा से निजात पाने का संकल्प ले, जो बच्चों में नफरत या हिंसा का बीज बोती है। शिक्षा वही है जो ज्ञान, विज्ञान और स्वावलंबन की राह दिखाए। केवल एक पुस्तक से संपूर्ण शिक्षा नहीं मिलती; शिक्षा का उद्देश्य व्यापक चिंतन और रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना है।

मंत्री ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले महान समाज सुधारक थे। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय में अध्ययन करना छात्रों के लिए गर्व की बात है।

दीक्षांत समारोह में उपस्थित उपाधिधारकों को संबोधित करते हुए योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि दीक्षांत का अर्थ शिक्षांत नहीं, यह एक नए जीवन की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता और गुरुओं को कभी न भूलें, क्योंकि उन्हीं के परिश्रम से यह सफलता संभव हुई है।

मंत्री ने कहा कि समाज ने जिन संसाधनों से शिक्षा उपलब्ध कराई है, अब उन संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की बारी विद्यार्थियों की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से मिले संस्कार ही व्यक्ति और समाज, दोनों के निर्माण की आधारशिला हैं।

SP_Singh AURGURU Editor