इतना क्यों नहीं समझते राहुल गांधी कि वे छोटे निवेशकों का नुकसान करा रहे हैं
उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में केस दर्ज होने के मामले में सोमवार को शुरू हुए संसद के शीत सत्र के पहले ही दिन इस मुद्दे पर इतना हंगामा बरपा कि सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इन घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में आगरा के प्रमुख उद्यमी और एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर के अपने विचार हैं। क्या कह रहे हैं पूरन डावर, पढ़िए-
राजनीति में किस तरह गुमराह किया जाता है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के लिए किस तरह समस्या खड़ी करते हैं, यह एक बार फिर सामने आ चुका है। वे लम्बे समय से अडानी का रोना लगातार रोते आ रहे हैं। इस बात को कोई डिनाई नहीं कर सकता कि भारत के सरकारी क्षेत्र में पॉवर टेंडर हासिल करने में लेन-देन होता है। अमेरिका में भी होता है। अमेरिका में इसे लॊबिंग कहते हैं। बाक़ायदा बैलेंस शीट में इस मद का बड़ा पैसा खर्च में दिखाया जाता है।
गौतम अडानी के मामले में ये आरोप जिन सरकारों पर पर है, वे सारी कांग्रेस या कांग्रेस के सहयोगी दलों की राज्य सरकारें हैं। ये आरोप न्यूयॉर्क की एक साउथ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में लगाये गये हैं। ज़ाहिर है कि कोई निवेशक तो कोर्ट जाएगा नहीं। दूसरी ओर अडानी के शेयरों की कीमतें गिरने पर नुक़सान इन्हीं निवेशकों का होगा।
यह काम अमेरिका की बड़ी स्टॉक ट्रेडिंग कंपनियां करती हैं जो इसी तरह शेयरों को गिराकर इन्ही शेयरों को सस्ते दाम पर ख़रीदवाती हैं। शेयर बाज़ार में ये आम बात है।
कभी हिंडनबर्ग तो कभी जॊर्ज सोरोस समर्थित और कोई कंपनी ये काम करती हैं, लेकिन भारत में कुछ अपरिपक्व नेता भी ऐसी गतिविधियों को हवा देकर अपनी और अपने देश दोनों की जड़ें खोदने का काम करते हैं। अडानी को अल्प समय के लिए वास्तविक नहीं, नॉशनल लॉस हो सकता है जबकि सीधे नुक़सान तो छोटे-छोटे निवेशकों का होता है। यह बात इन नेताओं को समझ में क्यों नहीं आती।