पत्नी की सतर्कता से बची बड़ी ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में फंसे बरेली के रिटायर्ड प्रोफेसर

बरेली में रिटायर्ड प्रोफेसर राजीव मेहरोत्रा को साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में फंसाने की कोशिश की। फर्जी पुलिस बनकर उन्हें एक घंटे तक डराया गया कि उनका आधार अपराध में इस्तेमाल हुआ है। प्रोफेसर की पत्नी की सतर्कता और बेटे की तत्परता से ठगी टल गई। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है।

Jul 14, 2025 - 19:29
Jul 14, 2025 - 19:30
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पत्नी की सतर्कता से बची बड़ी ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में फंसे बरेली के रिटायर्ड प्रोफेसर
प्रोफेसर मेहरोत्रा और पास में सतर्क पत्नी, बरेली स्थित घर का दृश्य।

-ऑटोमेटेड कॉल, नकली पुलिस और डर का साइबरजाल – अब ठग ऐसे फंसा रहे हैं आम लोगों को

-आरके सिंह-

बरेली। सोचिए, आपके मोबाइल पर कॉल आए और अचानक एक आवाज बोले- आपका आधार अपराध में इस्तेमाल हुआ है, आप भाग नहीं सकते, पुलिस आपके घर पहुंच रही है! अगर आप घबरा जाएं, तो समझ लीजिए आप साइबर ठगी के नए हथियार ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के शिकार हो सकते हैं।

ऐसा ही कुछ हुआ बरेली कॉलेज के कॉमर्स विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव मेहरोत्रा के साथ, जब सोमवार सुबह एक ऑटोमेटेड कॉल के जरिए उन्हें मानसिक तौर पर ‘गिरफ्तार’ कर लिया गया। करीब एक घंटे तक नकली पुलिस अधिकारी, मुंबई के फर्जी कोलाबा थाने और सीबीआई जैसी धमकियों के बीच प्रोफेसर को डराया जाता रहा।

कॉल का स्क्रिप्टेड आतंक

आपका आधार गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है’, ‘आप पर मामला दर्ज है’, “पुलिस टीम निकल चुकी है”- ऐसे जुमले लगातार सुनाए जाते रहे।
कॉल पर महिला अधिकारी बनी एक स्कैमस्टर ने खुद को सरकारी एजेंसी से बताया और फिर कॉल को ‘सीनियर अफसर अजय’ और ‘इंस्पेक्टर’ से जोड़ दिया। हर बार एक ही बात- आप अपराधी हैं, चुपचाप हमारी बात मानिए।

पत्नी की सूझबूझ बनी ढाल

इस दौरान प्रोफेसर की पत्नी को कॉल पर हो रही बातचीत में कुछ गड़बड़ लगी। उन्होंने तुरंत अपने बेटे को बताया और बेटे ने समझदारी दिखाते हुए मोबाइल का इंटरनेट बंद करवा दिया और कॉल कटवा दी। इसी सधी हुई प्रतिक्रिया से एक बड़ी आर्थिक ठगी होते-होते टल गई।

एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि प्रो. मेहरोत्रा की तहरीर पर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है और साइबर क्राइम सेल को सतर्क कर दिया गया है।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम?

यह साइबर ठगी की नई तकनीक है जिसमें ठग किसी सरकारी अफसर की आवाज या पहचान लेकर ऑटोमेटेड कॉल और लाइव धमकी के जरिए व्यक्ति को डराते हैं। लोग डर के मारे बैंक डिटेल, ओटीपी या स्क्रीन एक्सेस तक दे देते हैं, और खाते मिनटों में साफ हो जाते हैं।

सावधान रहें, घबराएं नहीं

-सरकारी एजेंसियां फोन पर कोई मामला नहीं निपटातीं।

-कोई भी धमकीभरी कॉल आए तो सत्यापन करें।

-किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

-तत्काल नेट बंद करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

SP_Singh AURGURU Editor