यूपी में भाजपा को मिलेगा पुराना सेनापति? यूपी अध्यक्ष पद के लिए केशव प्रसाद मौर्य का नाम चर्चाओं में

लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक चर्चाओं का बाजार गर्म है। पार्टी की रणनीति में ओबीसी समीकरण को साधने और सियासी संतुलन बैठाने के लिहाज से एक बार फिर केशव प्रसाद मौर्य का नाम प्रमुखता से चर्चाओं में है। सूत्रों की मानें तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें दोबारा यूपी संगठन की कमान सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

Jul 16, 2025 - 13:07
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यूपी में भाजपा को मिलेगा पुराना सेनापति? यूपी अध्यक्ष पद के लिए केशव प्रसाद मौर्य का नाम चर्चाओं में

पिछड़े वर्ग को साधने की रणनीति

केशव प्रसाद मौर्य को फिर से कमान सौंपे जाने के पीछे भाजपा का सामाजिक गणित सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। जिस तरह 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ दी थी और अब उनके बसपा में जाने की संभावना प्रबल हो रही है, उस स्थिति में भाजपा को मौर्य समाज समेत पूरे ओबीसी वर्ग में विश्वास पैदा करने के लिए केशव मौर्य सबसे उपयुक्त चेहरा दिख रहे हैं।

अमित शाह से मुलाक़ात और संकेत

हाल ही में केशव प्रसाद मौर्य की गृह मंत्री अमित शाह से लंबी मुलाक़ात ने इन अटकलों को और बल दे दिया है। इसे महज़ शिष्टाचार नहीं माना जा रहा, बल्कि आगामी प्रदेश अध्यक्ष की संभावित जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक विमर्श के रूप में देखा जा रहा है।

सीएम योगी से स्वतंत्र चेहरा

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मौर्य को संगठन का सशक्त, मगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्वतंत्र चेहरा माना जाता है। यही वजह है कि उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की संभावना को सीएम के प्रभाव से परे नेतृत्व स्थापित करने की दिशा में देखा जा रहा है। इससे पहले स्वतंत्रदेव सिंह और भूपेंद्र चौधरी के बारे में कहा जाता रहा है कि वे योगी आदित्यनाथ के करीबी रहे हैं।

संगठनात्मक अनुभव मौर्य के पक्ष में

केशव मौर्य को पार्टी में संगठन का व्यक्ति माना जाता है। विहिप और बजरंग दल जैसे संगठनों में वर्षों तक सक्रिय रहने के साथ, 2017 में उनके ही अध्यक्ष रहते भाजपा यूपी में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी। यही ट्रैक रिकॉर्ड उन्हें अन्य संभावित चेहरों पर भारी बना सकता है।

अध्यक्ष पद की घोषणा में देरी क्यों?

भाजपा ने हाल ही में कई राज्यों में तेज़ी से प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य का मामला अब तक लंबित है। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष अब बदलने वाला है और पार्टी नेतृत्व चाहता है कि यूपी का नेतृत्व तय करने से पहले शीर्ष नेतृत्व की तस्वीर साफ हो जाए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले 50% से अधिक प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है, जिससे संगठनात्मक कोरम पूरा हो गया है। इसलिए अब यूपी के अध्यक्ष की घोषणा राष्ट्रीय नेतृत्व तय होने के बाद की जाएगी, ऐसा माना जा रहा है। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले भी हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि भाजपा चौंकाने वाले फैसले लेती रही है।

SP_Singh AURGURU Editor