कर्नाटक में फिर चमका आगरा का यादव परिवार, ओपन नेशनल बेंचरेस्ट चैम्पियनशिप में हासिल की चार पदकों के साथ स्वर्णिम सफलता

कर्नाटक के मालूर में आयोजित द्वितीय ओपन नेशनल एयर राइफल बेंचरेस्ट चैम्पियनशिप में आगरा के यादव परिवार ने एक बार फिर अद्भुत प्रदर्शन करते हुए चार पदकों के साथ इतिहास रच दिया। महिलाओं, जूनियर और मास्टर्स, तीनों वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर इस परिवार ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा, तैयारी और संघर्ष को नई ऊंचाई दी है। कर्नाटक में रचा गया यह स्वर्णिम अध्याय बताता है कि जब एक परिवार एक सपने के साथ चलता है, तो जीत केवल उपलब्धि नहीं, विरासत बन जाती है।

Nov 28, 2025 - 12:17
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कर्नाटक में फिर चमका आगरा का यादव परिवार, ओपन नेशनल बेंचरेस्ट चैम्पियनशिप में हासिल की चार पदकों के साथ स्वर्णिम सफलता
कर्नाटक के मालूर में आयोजित द्वितीय ओपन नेशनल एयर राइफल बेंचरेस्ट चैम्पियनशिप में आगरा के यादव परिवार के सदस्य, जिन्होंने चार पदक जीते।

आगरा/बेंगलुरु। राष्ट्रीय निशानेबाज़ी के इतिहास में एक बार फिर आगरा का यादव परिवार छा गया। कर्नाटक स्टेट रिमफायर एंड बेंचरेस्ट शूटिंग फेडरेशन द्वारा रैब्साई के सहयोग से मालूर तालुक, कोलार जिले में 21 से 23 नवंबर तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में परिवार के चार सदस्यों ने अपनी-अपनी श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए।

सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके बेंगलुरु पहुंचे इस परिवार ने केवल प्रतियोगिता में भाग ही नहीं लिया, बल्कि अपने धैर्य, समर्पण और कौशल के बूते प्रतियोगिता में अमिट छाप छोड़ी। आयोजन स्थल पर यादव परिवार का प्रदर्शन प्रतिभा और परिश्रम का अनोखा संगम बन गया।

चार सदस्यों की चार ऐतिहासिक उपलब्धियां

 श्रीमती पियूषिका यादव – महिला वर्ग में स्वर्ण पदकः दो बच्चों की मां होते हुए भी पियूषिका ने 236/250 के शानदार स्कोर के साथ महिला (20+) वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। साथ ही प्रेसिओल स्पोर्ट्स कंपनी की बेंचरेस्ट प्रो एयर रायफल भी जीती। उनका प्रदर्शन महिला शक्ति, एकाग्रता और तकनीकी दक्षता का अद्वितीय उदाहरण रहा।

मास्टर वेदार्य सिंह यादव (12 वर्ष) – अंडर-19 में स्वर्ण पदकः सेंट पीटर्स स्कूल का यह बाल निशानेबाज़ 12 वर्ष की उम्र में ही 236/250 के सर्वोच्च स्कोर के साथ अंडर-19 वर्ग में स्वर्ण पदक विजेता बना। वेदार्य ने जूनियर बॉयज़ के टॉप स्कोरर के रूप में एआरबीएन स्पोर्ट्स की राइफल भी अपने नाम की। उनका प्रदर्शन बताता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।

मास्टर अद्वैत सिंह यादव (10 वर्ष) – अंडर-19 में कांस्य पदकः सिर्फ 10 वर्ष की उम्र में अद्वैत ने अंडर-19 वर्ग में कांस्य पदक जीतकर सभी को चकित कर दिया। वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच खेलते हुए उनका यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों में भारतीय निशानेबाज़ी को नई दिशा दे सकता है।

मधुकर यादव – मेंस मास्टर्स टीम वर्ग में रजत पदकः परिवार के मुखिया मधुकर यादव ने 224/250 के मजबूत स्कोर के साथ रजत पदक जीतकर यह साबित किया कि अनुशासन और धैर्य सफलता की बुनियाद हैं। अपने बच्चों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने मधुकर का प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए भविष्य में नई उम्मीदें जगाता है।

यादव परिवार की यह सामूहिक सफलता केवल पदकों का संग्रह नहीं, बल्कि खेल भावना, अनुशासन और पारिवारिक एकता का प्रेरक उदाहरण है। वेदार्य और अद्वैत जैसे बाल निशानेबाज़ों की उपलब्धियाँ यह संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को स्वर्णिम भविष्य इसी परिवार से मिल सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor