आधा घंटे की बारिश में लबालब हुआ 'स्मार्ट सिटी' का यमुना विहार, सवाल वही- करे कौन? फर्क किसे?
आगरा। ‘करे कौन? फर्क किसे?’ ये केवल सवाल नहीं, बल्कि उन हजारों नागरिकों की पीड़ा है जो हर बरसात में इसी ताने-बाने में उलझ जाते हैं। मंगलवार सुबह महज आधे घंटे की तेज बारिश ने आगरा की ‘स्मार्ट सिटी’ बनने की पोल खोल दी। कमला नगर के विस्तारित क्षेत्र, कर्मयोगी के यमुना विहार फेस-2 का नज़ारा किसी जलभराव ग्रस्त गांव से कम नहीं था। कॊलोनी की हर गली पानी से लबालब, घरों में घुसता पानी, ठप यातायात और हर कोने से उठती सड़ांध की बदबू।
नाले चोक, सड़कें नदी, जिम्मेदार गायब
हालात ये थे कि बारिश थमने के काफी देर बाद भी जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। जलभराव से सड़कों पर जमे पानी में वाहन फंसे, लोग फिसले, और कई घरों में सीवर का पानी घुस गया। नालों की सफाई कब हुई थी, किसने करवाई थी, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता।
'स्मार्ट सिटी' का नाम सुनते ही चिढ़ मचती है!
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर यह हालात आधे घंटे की बारिश में हैं, तो मानसून की पूरी बरसात में क्या होगा, सोचना भी डरावना है। जब कोई स्मार्ट सिटी का नाम लेता है, तो हमें गुस्सा आता है, चिढ़ होती है। ये मज़ाक है या ज़मीन से कटी हुई योजना?
कागज़ों में क्लीन, जमीनी हकीकत में गटर
लोग शिकायत लेकर गए, नगर आयुक्त और पार्षद को ज्ञापन दिए, फोटो भेजे, यहां तक कि ट्वीट तक कर डाले, मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात। अधिकारी कहते हैं, फील्ड रिपोर्ट ओके है, नेताओं के पास वक्त नहीं। वहीं अधीनस्थों की खानापूरी रिपोर्ट फाइल में लगकर धूल खा रही है।
लोगों और संपत्ति को खतरा, मगर फिर भी ‘करे कौन?’
यह जलभराव अब केवल असुविधा नहीं, बीमारियों और संपत्ति को नुकसान का कारण बन चुका है। मच्छरों की भरमार, सीवर मिश्रित जल और गंदगी से बच्चे, बुज़ुर्ग और बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। लेकिन आखिर सवाल फिर वहीं- ‘करे कौन? फर्क किसे?’
कॊलोनी के हर घर में खतरा ही खतरा
यमुना विहार कॊलोनी का मुख्य नाला बैक मारता है और फिर पानी घरों में प्रवेश कर जाता है। इससे फर्नीचर आदि का नुकसान हो रहा है। गंदगी, सिल्ट घरों में आ रही है। महिलाएं पूरा पूरा दिन सिल्ट साफ कर रहीं हैं। बिजली के खंभों में करंट का डर रहता है। बच्चे खेलते हैं तो खतरा बना रहता है। गड्ढे दिखाई नहीं देते और गाड़ियां पलट जाती हैं।
स्थानीय निवासी अब आंदोलन के मूड में हैं। उनका कहना है कि अगर समाधान नहीं हुआ, तो वे निगम कार्यालय के सामने प्रदर्शन करेंगे।