योगी सरकार का बड़ा कदम : अब आउटसोर्सिंग में नहीं होगा खेल, कर्मचारियों को मिलेगा पूरा हक
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह बदल देने वाला बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड के गठन को मंजूरी दे दी। अब प्रदेश में आउटसोर्सिंग अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह होगी। कर्मचारियों को पूरा मानदेय, ईपीएफ और ईएसआई का लाभ मिलेगा और एजेंसियों का चयन विभाग नहीं बल्कि निगम जेम पोर्टल के माध्यम से करेगा।
इसलिए जरूरी था निगम का गठन
वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि लंबे समय से विभागीय एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को पूरा मानदेय नहीं मिल रहा था। एजेंसियां ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाओं का पैसा भी हड़प लेती थीं। कर्मचारियों के शोषण और इन अनियमितताओं को खत्म करने के लिए निगम का गठन किया गया है।
नई व्यवस्था की प्रमुख बातें
आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन अब विभाग नहीं, बल्कि निगम जेम पोर्टल से करेगा।
कर्मचारियों का मानदेय ₹16,000 से ₹20,000 प्रतिमाह तय।
महीने में 26 दिन सेवा और तीन साल तक नियुक्ति का प्रावधान।
वेतन 1 से 5 तारीख के बीच सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा।
ईपीएफ और ईएसआई की राशि सीधे कर्मचारियों के खातों में जाएगी।
किसी भी गड़बड़ी पर सेवा तुरंत समाप्त हो सकेगी।
लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगी भर्ती।
कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकार
नई व्यवस्था में संवैधानिक आरक्षण का पालन होगा। एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और महिलाओं को आरक्षण मिलेगा। महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव का अधिकार होगा। प्रशिक्षण के जरिए दक्षता बढ़ाई जाएगी। सेवा के दौरान मृत्यु पर अंतिम संस्कार सहायता के रूप में ₹15,000 दिए जाएंगे।
ई-बसों का नया मॉडल
कैबिनेट ने कानपुर और लखनऊ में ई-बसों को नेट कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल पर चलाने का निर्णय लिया।
10-10 रूटों पर 9 मीटर लंबी एसी ई-बसें चलेंगी।
कॉन्ट्रैक्ट अवधि 12 वर्ष।
एक रूट पर लगभग 10.30 करोड़ रुपये खर्च, जिसमें से 9.50 करोड़ रुपये बसों की खरीद पर खर्च होंगे।
डिजाइन, वित्तपोषण, खरीद और रखरखाव निजी ऑपरेटर करेंगे।
90 दिनों में प्रोटोटाइप और एक साल में संचालन अनिवार्य।
किराया निर्धारण सरकार करेगी, संग्रह ऑपरेटर करेंगे।
निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30
कैबिनेट ने नई निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 को भी मंजूरी दी। इसका लक्ष्य 2030 तक पंजीकृत निर्यातकों की संख्या में 50% वृद्धि। सभी जिलों को निर्यात गतिविधियों से जोड़ना भी शामिल है। डिजिटल तकनीक, अवसंरचना, वित्तीय सहायता, निर्यात ऋण और बीमा पर जोर। उत्तर प्रदेश को वैश्विक निर्यात हब बनाने की योजना है।
शाहजहांपुर में नया विश्वविद्यालय
कैबिनेट ने शाहजहांपुर में स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
मुमुक्ष आश्रम ट्रस्ट की 5 शैक्षणिक इकाइयां विश्वविद्यालय में शामिल होंगी।
कुल 21.01 एकड़ भूमि में से लगभग 20 एकड़ विश्वविद्यालय को।
पहला चरण : उच्च शिक्षा विभाग और ट्रस्ट के बीच एमओयू।
औपचारिक कार्यवाही उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत पूरी होगी।