मथुरा के सारस्वत ब्राह्मण थे अभिनेता मनोज कुमार, मांट क्षेत्र में पैतृक गांव  

शुक्रवार को मुंबई में अंतिम सांस लेने वाले भारतीय सिनेमा के महान कलाकार मनोज कुमार की अब यादें ही शेष हैं। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि अपनी फिल्मों से देशभक्ति की बयार बहाने वाले मनोज कुमार मूल रूप से मथुरा जनपद के निवासी थे। उनका पैतृक गांव मथुरा जिले की मांट तहसील के अंतर्गत है।

Apr 4, 2025 - 10:59
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मथुरा के सारस्वत ब्राह्मण थे अभिनेता मनोज कुमार, मांट क्षेत्र में पैतृक गांव   

-देश के विभाजन से पहले रोजी-रोटी के लिए एबटाबाद और मुल्तान में जा बसे थे पूर्वज

-एक बार वृंदावन आये अभिनेता ने खुद ही बताया था खुद के मथुरा का होने का राज

-सीपी सिंह सिकरवार-

हिन्दी सिनेमा के महान कलाकार मनोज कुमार (87 वर्ष) आज दुनिया से चल गये। 'भारत का रहने वाला हूं…' गीत की प्रसिद्धि के बाद उन्हें लोग 'भारत कुमार' भी कहते थे। उन्हें फिल्म जगत का 'शेर'  माना जाता था। फिल्मी मनोरंजन को उन्होंने  अपनी कालजयी फिल्मों जैसे पूरब और पश्चिम, उपकार, शोर, क्रान्ति, रोटी कपडा और मकान आदि से देश में देशभक्ति की बयार चला दी थी।

मनोज कुमार को कुछ वर्ष पहले स्वामी हरिदास संगीत समारोह में आयोजक व बांके बिहारी जी के सेवायत श्री गोपी गोस्वामी जी ने वृंदावन बुलाया था। वृन्दावन में उन्होंने कुछ ऐसी बातें बतायीं कि जिन्हें सुनकर लोग चौंक गये थे।

अभिनेता मनोज कुमार ने बताया था, "हमारे परिवार का निकास मांट (मथुरा) के पास एक गांव से है। हमारे पुरखे यहां से निकलकर रोजी रोटी के लिए ऐबटाबाद और कुछ मुल्तान में जा बसे थे। ये दोनों शहर अब पाकिस्तान में हैं। देश के विभाजन के समय हमारा परिवार एटबावाद से दिल्ली आ बसा था। हम लोग सारस्वत ब्राह्मण हैं"। जैसा कि हम जानते हैं वृंदावन में ज्यादातर गोस्वामी मूलतः सारस्वत विप्र हैं। बलदेव से मांट के मध्य जो गांव हैं, उनमें सारस्वत विप्र ही हैं। मनोज कुमार की बात इसी से पुष्ट होती है। वैसे उनका असली नाम हरि किशन गिरि गोस्वामी था।

वृंदावन में ही अखंडानंद जी मोतीझील आश्रम के पास उनके परिजनों के गुरु जी का 'घासी संत मंडल आश्रम' है। वहां पहले भी उनका आना-जाना रहा था।

देवानंद की तरह मनोज कुमार ने भी इमरजेंसी का विरोध किया था। इस पर इंदिरा जी उनसे नाराज हो गयी थीं। क्रांति (1974) फिल्म के लिए गीतकार वर्मा मलिक ने "महगाई मार गई..." गीत लिखा था, उससे इंदिरा गांधी सरकार बैचेन हो गई थी। उस समय इस गीत पर बैन लगाने के प्रयास भी हुए थे।

परदे पर गाया उनका एक रोमांटिक गीत ऐसा था, जिसमें सिर्फ तीन वाद्य यंत्र बजाए गये थे। वह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ। इस गीत का अपने आप में एक रिकार्ड बन गया। यह गीत था--"कोई जब तुम्हारा ह्दय तोड़ दे, तड़पता हुआ कोई छोड़ दे" ।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल बृज तीर्थ विकास परिषद में समन्वयक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं)

SP_Singh AURGURU Editor