काशी की तर्ज़ पर शिवमय हुआ आगरा: बाबा मनःकामेश्वर नाथ के डोले संग मसाने की होली में भस्म, गुलाल और भक्ति का अलौकिक संगम
फाल्गुन की मस्ती, भक्ति की उफान और शिवभक्ति के जयघोष के बीच आगरा की धरती उस वक्त काशी बन गई, जब रावत पाड़ा स्थित श्री मनःकामेश्वर मंदिर से बाबा श्रीमनःकामेश्वर नाथ का दिव्य डोला नगर भ्रमण के लिए निकला। भस्म, अबीर और गुलाल से सजा यह दृश्य केवल होली उत्सव नहीं, बल्कि वैराग्य और उल्लास के संगम की जीवंत प्रस्तुति बन गया।

डोले से पूर्व बाबा श्रीमनःकामेश्वरनाथ के श्री विग्रह का पूजा-अर्चना करते महंत योगेशपुरी।
आगरा। रावतपाड़ा स्थित श्रीमनःकामेश्वर मंदिर से जैसे ही बाबा मनःकामेश्वर नाथ का डोला निकला, पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के बीच मंगल आरती संपन्न हुई। श्री महंत योगेश पुरी ने विधि-विधान से बाबा के श्री विग्रह का पूजन-अर्चन कर शिव-पार्वती स्वरूप को नंदी पर विराजमान किया और नगरवासियों के दर्शनार्थ डोले को रवाना किया।
डोले की अगुवाई गणेश जी की सवारी ने की, जबकि पीछे सुसज्जित झांकी में विराजमान बाबा श्रीमनःकामेश्वर नाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। शिवभक्त भस्म और अबीर से मसाने की होली खेलते हुए भक्ति-भाव में सराबोर नजर आए। ढोल, नगाड़े, चंग और शंखनाद की संयुक्त गूंज ने वातावरण को पूर्णतः शिवमय बना दिया।
गढ़ी ईश्वरा से आए फाग गायकों के दल ने पारंपरिक रसिया और शिव-स्तुति गाकर श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। अनेक भक्त शिवगण, भूत-प्रेत और गणों का स्वरूप धारण कर डोले के साथ चलते रहे, जिससे यह अलौकिक दृश्य और भी सजीव हो उठा।
डोला जब चिम्मन चौराहा, सुभाष बाजार, जौहरी बाजार, रावतपाड़ा और दरेसी क्षेत्र से गुजरा तो घरों की छतों से पुष्पवर्षा की गई। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने जलपान और प्रसाद की व्यवस्था कर बाबा के डोले का भावभीना स्वागत किया। विदेशी श्रद्धालु भी इस आयोजन में शामिल हुए और सनातन संस्कृति की इस अनूठी परंपरा को अपने कैमरों में कैद करते दिखे।
इस अवसर पर श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि यह डोला केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि शिव के वैराग्य और आनंद के अद्वितीय संगम का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पूर्वकाल में नगर में अनेक डोले निकलते थे, लेकिन आज यह परंपरा श्री मनःकामेश्वर मंदिर के माध्यम से जीवंत है, जो आगरा की सांस्कृतिक आत्मा को अभिव्यक्त करती है।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस बार भी विदेशी श्रद्धालु बाबा की होली में सराबोर हुए। बाबा श्रीमनःकामेश्वर नाथ के डोले संग खेली गई मसाने की होली यह संदेश देती है कि जब भक्ति उत्सव बनती है, तो पूरा नगर स्वयं शिवधाम में परिवर्तित हो उठता है।