मोती कटरा बड़ा मंदिर में संत संघों का मंगल मिलन, धर्मसभा में गूंजा आत्मकल्याण और संयम का संदेश
आगरा के श्री अग्रवाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मोती कटरा में आचार्य चैत्यसागर जी महाराज, आचार्य इन्द्रनंदी जी महाराज तथा आर्यिका विशुद्धमती एवं विज्ञमती माताजी ससंघ का भव्य मंगल मिलन संपन्न हुआ। इस अवसर पर धर्म, संयम, साधना और आत्मकल्याण जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हुई। वहीं हरिपर्वत स्थित आचार्य शांतिसागर सभागार में आयोजित धर्मसभा में आर्यिका विज्ञमती माताजी ने वीतराग प्रतिमाओं के दर्शन और आध्यात्मिक साधना के महत्व पर प्रेरक प्रवचन दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
आगरा। जैन समाज के लिए शुक्रवार का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, धर्म प्रभावना और साधना के संदेश से परिपूर्ण रहा। शहर के प्राचीन श्री अग्रवाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मोती कटरा में आचार्य चैत्यसागर जी महाराज ससंघ, आचार्य इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ तथा गणिनी शिरोमणि आर्यिका विशुद्धमती माताजी एवं आर्यिका विज्ञमती माताजी ससंघ का ऐतिहासिक और भव्य मंगल मिलन संपन्न हुआ। वहीं दूसरी ओर हरिपर्वत स्थित आचार्य शांतिसागर सभागार में आयोजित धर्मसभा में आर्यिका संघ ने आत्मशुद्धि, मंदिर दर्शन और आध्यात्मिक उन्नति का गूढ़ संदेश देकर श्रद्धालुओं को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मोती कटरा स्थित बड़ा मंदिर परिसर में एकत्रित होने लगे थे। आचार्य इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका संघ ने एम.डी. जैन परिसर, हरिपर्वत से मंगल विहार करते हुए बड़ा मंदिर पहुंचकर आचार्य चैत्यसागर जी महाराज ससंघ से मंगल मिलन किया। जैसे ही दोनों संत संघ आमने-सामने हुए, पूरा मंदिर परिसर जयघोष, श्रद्धा और भक्ति के स्वर से गुंजायमान हो उठा।
श्रद्धालुओं ने विनम्रतापूर्वक संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दुर्लभ अवसर को समाजजनों ने अपने जीवन का सौभाग्य बताया। संतों ने कहा कि संत संघों का मिलन केवल दो समूहों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार, साधना और आध्यात्मिक परंपराओं का संगम है, जो समाज को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करता है।
धर्म चर्चा में जिनवाणी और आत्मकल्याण पर हुआ मंथन
मंगल मिलन के उपरांत दोनों आचार्य संघों एवं आर्यिका संघ के मध्य धर्म चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में जिनवाणी, संयम, साधना, आत्मकल्याण तथा वर्तमान समय में धर्म प्रभावना जैसे विषयों पर गंभीर और सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ। संतों ने कहा कि वर्तमान समय में आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही जीवन को संतुलन और शांति प्रदान करते हैं।
धर्मसभा में आर्यिका विज्ञमती माताजी ने सुनाया प्रेरक प्रसंग
आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमती माताजी ने मंदिर दर्शन और वीतरागता के महत्व को एक प्रेरक उदाहरण के माध्यम से समझाया।
उन्होंने बताया कि एक बालक ने अपने गुरु से पूछा कि प्रतिदिन मंदिर जाकर पत्थर की मूर्ति के दर्शन करने से क्या लाभ होता है। गुरु ने उससे पूछा कि लोहे के एक साधारण टुकड़े को चुंबक कैसे बनाया जाता है। बालक ने उत्तर दिया कि बार-बार चुंबक के संपर्क में लाने से वह भी चुंबकीय गुण प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार जब मनुष्य बार-बार वीतराग प्रतिमाओं के दर्शन, स्तुति और पूजा करता है तो उसकी आत्मा भी धीरे-धीरे शुद्धता की ओर अग्रसर होती है और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि "मंदिर आना बड़ी बात नहीं है, मंदिर से सीख लेकर घर जाना और उसे जीवन में उतारना सबसे बड़ी बात है।"
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम और धर्मसभा में आगरा दिगंबर जैन परिषद के महामंत्री मनीष कुमार जैन, उपमंत्री विमल जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, सुशील जैन, अविनाश जैन, चक्रेश जैन, सचिन जैन, पंकज जैन, उषा जैन, कांता जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 6 जून 2026 को प्रातः 8:15 बजे से आचार्य शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत में मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के मंगल प्रवचन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।