श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज मंदिर में दान लीला मनोरथ, दही प्रसाद से अभिषिक्त हुआ भक्तिभाव

आगरा स्थित प्राचीन पुष्टिमार्गीय श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर में पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत दान लीला (दान एकादशी) के अवसर पर आज दान मनोरथ उत्सव बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और वैष्णव परंपरा के अनुरूप भव्य रूप से मनाया गया, जिसमें ठाकुरजी को दही का भोग अर्पित कर भजन-कीर्तन और लीला स्मरण के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

May 26, 2026 - 21:17
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श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज मंदिर में दान लीला मनोरथ, दही प्रसाद से अभिषिक्त हुआ भक्तिभाव

दान मनोरथ उत्सव में ठाकुरजी को अर्पित हुआ दही का भोग

आगरा के प्राचीन पुष्टिमार्गीय श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर में पुरुषोत्तम मास के दौरान आज दान लीला का विशेष आयोजन किया गया। फूलों से सुसज्जित दिव्य सिंहासन पर विराजमान ठाकुरजी को दही का विशेष प्रसाद अर्पित किया गया।

मंदिर परिसर भक्ति संगीत, शंख-ध्वनि और कीर्तन से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के समक्ष भजन-कीर्तन करते हुए भाव-विभोर होकर नृत्य भी किया। पूरा वातावरण वैष्णव परंपरा की भक्ति रसधारा में सराबोर दिखाई दिया।

दान लीला का आध्यात्मिक अर्थ और परंपरा

यमुना भक्त बृज खंडेलवाल एवं मंदिर के महंत नंदन श्रोत्रिय ने बताया कि दान लीला श्रीकृष्ण की चंचल बाल लीलाओं का प्रतीक है। यह लीला व्रजभूमि में गोपियों द्वारा दूध, दही और मक्खन लेकर मथुरा जाने और मार्ग में बाल कृष्ण द्वारा प्रेमपूर्वक ‘दान’ स्वरूप उन्हें रोकने की दिव्य कथा को दर्शाती है।

कथानुसार कंस द्वारा लगाए गए मार्ग-शुल्क के प्रतीकात्मक स्वरूप में बाल कृष्ण या उनके सखा गोपियों से प्रेम और हास्य भाव में दान ग्रहण करते हैं। यह लीला केवल कर-व्यवस्था नहीं, बल्कि दिव्य प्रेम, आत्मसमर्पण, वात्सल्य और माधुर्य का आध्यात्मिक संदेश देती है।

पुष्टिमार्गीय परंपरा में भक्त स्वयं को गोपी भाव में स्थापित कर ठाकुरजी की सेवा को ही सर्वोच्च कर्तव्य मानते हैं और सभी अर्पण प्रभु-सुखार्थ मनोरथ के रूप में करते हैं।

पुरुषोत्तम मास में मनोरथ रूप में मनाए जाते हैं उत्सव

महंत नंदन श्रोत्रिय ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान सभी वार्षिक उत्सव संक्षिप्त रूप में ‘मनोरथ’ के रूप में आयोजित किए जाते हैं, जिसका उद्देश्य केवल प्रभु की प्रसन्नता और सेवा भावना होता है, न कि केवल औपचारिक उत्सव।

इस अवसर पर विशेष दान लीला पदों का गायन भी किया गया, जिनमें ‘गढते ग्वालिन उतारी’ और ‘दधि कान्चन मोल भाई’ जैसे पारंपरिक पदों ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया।

भक्ति रस में डूबा मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं की उपस्थिति

इस दिव्य आयोजन में जुगल श्रोत्रिय, नदल किशोर, मंजरी, बल्लभ, अनन्या सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने ठाकुरजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और भक्ति भाव में लीन होकर पूरे आयोजन का आनंद लिया।

SP_Singh AURGURU Editor