'गटर जेनरेशन' टिप्पणी पर कंगना रनौत के खिलाफ आगरा की कोर्ट में परिवाद दायर; पांच अगस्त को होगी सुनवाई
आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को कथित रूप से "गटर जेनरेशन" कहने और अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में आगरा की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने विशेष न्यायालय (एमपी-एमएलए) के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तिथि निर्धारित की है।
परिवाद में वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कहा है कि पिछले कुछ समय से नीट (NEET) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के बार-बार पेपर लीक होने से देश के करोड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इससे आहत और निराश होकर अनेक विद्यार्थियों ने आत्महत्या तक की, जबकि बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई 2026 को आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस एवं सुरक्षा बलों द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले तथा पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें अनेक छात्र-छात्राएं घायल हुए।
परिवादी ने यह भी कहा है कि छात्र आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विभिन्न विपक्षी नेताओं ने भी आवाज उठाई। परिवाद के अनुसार बढ़ते जनाक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया।
परिवाद में आरोप है कि 27 जुलाई 2026 को कंगना रनौत ने सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं के बारे में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें "गटर जेनरेशन" कहा और उनकी भाषा एवं व्यवहार पर भी अभद्र टिप्पणी की। परिवाद के अनुसार यह बयान विभिन्न समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ।
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा का कहना है कि इस कथित टिप्पणी से देशभर के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा उनकी स्वयं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने अपने परिवाद में कहा कि उनके साथ राजवीर सिंह एडवोकेट, रामदत्त दिवाकर एडवोकेट, नवीन वर्मा एडवोकेट, आई.एस. मौर्य एडवोकेट सहित अनेक लोगों की भावनाएं भी इस बयान से प्रभावित हुई हैं।
परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में थाना न्यू आगरा तथा पुलिस आयुक्त को शिकायत प्रेषित की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली गई।
परिवादी का आरोप है कि कंगना रनौत का कथित बयान संविधान के मूल कर्तव्यों की भावना के विपरीत, राष्ट्र और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। इसी आधार पर न्यायालय से आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, रामदत्त दिवाकर, सुमंत चतुर्वेदी, बी.एस. फौजदार, प्रीति कुमारी सहित अन्य अधिवक्ताओं ने अपने पक्ष की दलीलें प्रस्तुत कीं।
विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तिथि नियत की है।