कंगना रनौत की वकील के खिलाफ बार काउंसिल पहुंची शिकायत, वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा बोले- धमकी भरे नोटिस से मुकदमे को प्रभावित करने की कोशिश
आगरा। भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ किसानों के कथित अपमान और राजद्रोह से जुड़े मुकदमे में एक नया विवाद सामने आया है। राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन तथा बार काउंसिल ऑफ सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष को शिकायत भेजकर कंगना रनौत की अधिवक्ता अनसूया चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिवक्ता अनुसूया चौधरी द्वारा कानूनी नोटिस के जरिए मुकदमे को प्रभावित करने और दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
रमाशंकर शर्मा, जो कि कंगना रनौत केस में स्वयं वादी हैं, ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि वे किसान परिवार से आते हैं, स्वयं खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में भी उनके नाम कृषि भूमि दर्ज है। वह वर्ष 1983 से आगरा की दीवानी कचहरी में वकालत कर रहे हैं।
कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज कराया था मुकदमा
शिकायत के अनुसार, कंगना रनौत द्वारा 26 अगस्त 2020 को कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों को लेकर की गई कथित टिप्पणी तथा 16 नवंबर 2021 को देश की आजादी को भीख में मिली आजादी बताए जाने संबंधी बयान के खिलाफ उन्होंने विशेष न्यायालय सांसद-विधायक (एमपी-एमएलए) में किसानों के अपमान और राजद्रोह से संबंधित वाद दायर किया था।
मामले में 3 अप्रैल 2026 को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल 2026 की तारीख निर्धारित की थी। बाद में सुनवाई न हो पाने के कारण न्यायालय ने 30 अप्रैल 2026 को आदेश के लिए तिथि नियत की थी।
21 अप्रैल को दाखिल हुआ था प्रार्थना पत्र
रमाशंकर शर्मा के अनुसार, कंगना रनौत की ओर से पैरवी कर रहीं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी की जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान ने 21 अप्रैल 2026 को बिना नियत तिथि के न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उसमें कथित रूप से न्यायालय पर यह आरोप लगाया गया था कि बादी पक्ष को आईटी अधिनियम के बिंदुओं पर बहस और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अतिरिक्त अवसर देकर लाभ पहुंचाया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि उस प्रार्थना पत्र में न्यायालय से 30 अप्रैल को आदेश पारित न करने तथा प्रतिवादी पक्ष को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का समय देने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद न्यायालय ने 30 अप्रैल को आदेश सुरक्षित रखने के बजाय 20 मई 2026 की तिथि निर्धारित की थी।
कोर्ट में माफी मांगने की खबर से बौखलाकर भेजा नोटिस
रमाशंकर शर्मा का आरोप है कि 30 अप्रैल की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सुधा प्रधान से पूछा था कि पूर्व में दाखिल दस्तावेजों की प्रतियां वादी पक्ष को क्यों नहीं दी गईं। कथित रूप से संतोषजनक जवाब न मिलने पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की थी और सुधा प्रधान ने न्यायालय से क्षमा याचना की थी।
शर्मा का कहना है कि इसी घटनाक्रम से संबंधित समाचार विभिन्न समाचार पत्रों और समाचार चैनलों में प्रकाशित एवं प्रसारित हुए थे। इसके बाद 14 मई 2026 को अधिवक्ता अनसूया चौधरी की ओर से उन्हें एक कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसमें कथित रूप से कहा गया कि झूठी खबरें प्रकाशित कराकर उनकी और उनकी मुवक्किल कंगना रनौत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है।
15 दिन में माफी मांगने की दी गई चेतावनी
शिकायत के अनुसार नोटिस में रमाशंकर शर्मा से 15 दिन के भीतर लिखित माफी मांगने तथा भविष्य में ऐसे किसी बयान या समाचार के प्रकाशन से बचने को कहा गया था, जिससे कंगना रनौत या अनसूया चौधरी की प्रतिष्ठा प्रभावित हो। साथ ही कथित रूप से मानहानि और हर्जाने का मुकदमा दायर करने की चेतावनी भी दी गई थी।
नोटिस से मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा को नुकसान
रमाशंकर शर्मा ने शिकायत में कहा है कि 30 अप्रैल की सुनवाई के दौरान न तो अनसूया चौधरी और न ही कंगना रनौत स्वयं न्यायालय में उपस्थित थीं। ऐसे में उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचने का प्रश्न ही नहीं उठता। उनका कहना है कि अदालत में यदि कोई क्षमा याचना हुई थी तो वह न्यायालय से की गई थी, न कि किसी व्यक्ति विशेष से।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने धमकी भरा नोटिस भेजकर एक वरिष्ठ अधिवक्ता का अपमान किया है, अधिवक्ता अधिनियम की भावना के विपरीत कार्य किया है तथा उन्हें मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठागत क्षति पहुंचाई है।
बार काउंसिल से कार्रवाई की मांग
शिकायत पत्र में बार काउंसिल ऑफ इंडिया से पूरे मामले का संज्ञान लेकर अधिवक्ता अनसूया चौधरी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही शिकायत की एक प्रति अनसूया चौधरी को भी उनके पते पर भेजे जाने की जानकारी दी गई है।