गंगा दशहरा पर कविता, संस्कृति और संवेदना का संगम, संस्कार भारती की नमन काव्य गोष्ठी में प्रेम, विरह, राष्ट्र, गंगा और सामाजिक चेतना के स्वर गूंजे
आगरा। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर संस्कार भारती, आगरा महानगर द्वारा आयोजित 15वीं नमन काव्य गोष्ठी साहित्य, संस्कृति और भावनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बन गई। सेक्टर-15, आवास विकास कॉलोनी स्थित वरिष्ठ समाजसेवी एवं होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. कैलाश सारस्वत के क्लीनिक पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी में प्रेम, विरह, राष्ट्र, अध्यात्म, सामाजिक सरोकार और मां गंगा की महिमा से ओतप्रोत रचनाओं ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। देर शाम तक चले इस साहित्यिक आयोजन में कवियों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को पूरी तरह काव्यमय बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. कैलाश सारस्वत, वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार रवीन्द्र वर्मा, कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक गोयल, पर्यावरणविद चंद्रशेखर शर्मा तथा संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग द्वारा मां गंगा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश सारस्वत ने कहा कि काव्य अभिव्यक्ति प्रेम, विरह और अनुभूति की परम संवेदना है। कविता समाज को जोड़ने, मानवीय भावनाओं को अभिव्यक्त करने और सकारात्मक चेतना जगाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी आत्मा भी है।
वरिष्ठ कवि गाफिल स्वामी, इगलास ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक शुरुआत दी। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गीतकार ऋषभ ठाकुर ने मां गंगा पर अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों से खूब तालियां बटोरीं—
“घर-घर में तेरा वास मिला, हर घर का तुम सम्मान बनी,
गंगा अब तुम नदी नहीं हो, भारत की पहचान बनी।”
वरिष्ठ कवि रवीन्द्र वर्मा ने प्रेम, अपनत्व और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए कहा—
“होठों पर मुस्कान खिला कर, बोली में मधुरस घोलेंगे,
चलें प्रेम के गीत सुना कर, दुखित हृदय खिड़की खोलेंगे।”
कवि प्रभुदत्त उपाध्याय ने संघर्ष और लक्ष्य की प्रेरणा देते हुए अपनी रचना सुनाई—
“लाख मिलें कंटक राहों में अपनी धुन में चलता चल,
लक्ष्य बना ले जीवन का तू धीरे-धीरे चलता चल।”
कवयित्री अलका शर्मा ने अपने काव्य के माध्यम से बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों और सामाजिक विडंबनाओं को रेखांकित किया। वहीं श्रीराम कथा अध्येता आचार्य उमाशंकर पाराशर ने मां गंगा की महिमा का वर्णन करते हुए भगीरथ और सगर पुत्रों के प्रसंग को काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी एवं चिकित्सक डॉ. कैलाश सारस्वत का साहित्यकारों और कवियों द्वारा सम्मान भी किया गया। नन्द नन्दन गर्ग, ओम स्वरूप गर्ग, अशोक गोयल, अलका शर्मा, प्रभुदत्त उपाध्याय, एडवोकेट संजय कुमार, आचार्य उमाशंकर पाराशर सहित अनेक साहित्यकारों ने उन्हें सम्मानित किया।
काव्य गोष्ठी में कवि प्रकाश गुप्ता ‘बेबाक’, राजीव क्वात्रा आगरावासी, संजय कुमार एडवोकेट, डॉ. यशोयश, डॉ. शुभदा पाण्डेय, संस्कृत विद्वान डॉ. राजेंद्र दवे, जयपाल सिंह, देवेंद्र सिंह, नरसिंह नरवर, विनय बंसल, रामअवतार शर्मा, डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’, डॉ. केशव शर्मा, प्रणव कुमार कुलश्रेष्ठ टूंडला, चंद्रशेखर शर्मा, राजकुमार उपाध्याय, संगीतज्ञ डॉ. अंकिता शर्मा त्रिपाठी, आरती शर्मा, सुमन शर्मा, रामेन्द्र शर्मा रवि, बृजेश बेबाक, रूपेश कुमार स्नेह, युवा कवयित्री मोइत्रा सिंह तथा चित्रकार एवं कवयित्री रश्मि सिंह सहित अनेक रचनाकारों ने काव्यपाठ किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रभुदत्त उपाध्याय एवं संजय कुमार एडवोकेट ने संयुक्त रूप से किया। संयोजन संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महामंत्री ओम स्वरूप गर्ग ने व्यक्त किया। आयोजन की व्यवस्थाएं दीपक गर्ग, चंद्रशेखर शर्मा एवं सहयोगियों ने संभालीं।