खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को मिले विशेष पैकेज, आगरा को बनाया जाए फूड प्रोसेसिंग हब: चैम्बर की सरकार से मांग, 35% सब्सिडी से लेकर 10 करोड़ तक अनुदान की योजनाओं पर हुआ मंथन

आगरा। आगरा में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को नई गति देने और उद्यमियों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से सोमवार को चैम्बर सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र, पालीवाल पार्क आगरा के प्रधानाचार्य लोकेश कुमार तथा फूड प्रोसेसिंग डेवलपमेंट उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और अनुदानों की विस्तृत जानकारी दी।

Jun 1, 2026 - 20:33
 0
खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को मिले विशेष पैकेज, आगरा को बनाया जाए फूड प्रोसेसिंग हब: चैम्बर की सरकार से मांग, 35% सब्सिडी से लेकर 10 करोड़ तक अनुदान की योजनाओं पर हुआ मंथन
नेशनल चैंबर सभागार में हुई बैठक में मौजूद चैंबर अध्य़क्ष मनोज कुमार बंसल, खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य लोकेश कुमार और चैंबर के अन्य पदाधिकारी व सदस्य।

बैठक का संचालन खाद्य प्रसंस्करण प्रकोष्ठ के चेयरमैन विकास चतुर्वेदी ने किया। वहीं चैम्बर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत ने आगामी 14, 15 और 16 जून 2026 को आयोजित होने वाले फूड एक्सपो एंड कॉन्क्लेव-2026 की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।

फूड एक्सपो में मिलेंगी उद्योग जगत को नई संभावनाएं

राजकुमार भगत ने बताया कि फूड एक्सपो एंड कॉन्क्लेव-2026 में खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं से जुड़े अनेक विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने चैम्बर के सभी सदस्यों और उद्यमियों को इस आयोजन में भाग लेने का आमंत्रण दिया।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

आगरा को मिले विशेष पैकेज: मनोज बंसल

चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पूरी तरह गैर-प्रदूषणकारी और पर्यावरण अनुकूल उद्योग है। आगरा में ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) की पाबंदियों के कारण भारी उद्योगों की स्थापना में कठिनाइयां आती हैं, ऐसे में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग क्षेत्र के आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बन सकता है।

उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आगरा को खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए, जिससे यहां अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हों और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें।

उन्होंने कहा कि उद्योगों के विकास के लिए प्रशिक्षण केंद्र, परीक्षण प्रयोगशाला, तकनीकी सहायता केंद्र और जागरूकता कार्यक्रमों की भी आवश्यकता है।

35 प्रतिशत सब्सिडी और 10 लाख तक का लाभ

खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य लोकेश कुमार ने उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को पात्र परियोजना लागत, जिसमें संयंत्र, मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य शामिल हैं, पर 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये तक का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

रीफर वाहन खरीदने पर 50 लाख तक ब्याज सब्सिडी

लोकेश कुमार ने बताया कि रीफर वाहनों और मोबाइल प्री-कूलिंग वैन की खरीद के लिए पांच वर्षों तक ब्याज सब्सिडी की सुविधा उपलब्ध है। इसके तहत अधिकतम 50 लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यह सुविधा किसानों और उद्यमियों को उत्पादों के सुरक्षित भंडारण और परिवहन में मदद करेगी।

महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक अनुदान

बैठक में बताया गया कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बिजली आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर स्थापना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। वहीं महिला स्वामित्व और संचालन वाले खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों को 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन पर 10 करोड़ तक अनुदान

बैठक के दौरान कॉमन इक्विपमेंट सेंटर की अवधारणा और लाभों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कोल्ड चेन परियोजनाओं पर 35 प्रतिशत तथा मूल्य संवर्धन अवसंरचना परियोजनाओं पर 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।

इससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके मूल्यवर्धन में बड़ी मदद मिलेगी।

उद्योग और किसानों के लिए बड़ा अवसर

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम बन सकता है। यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए तो उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी खाद्य प्रसंस्करण राज्य बन सकता है।

बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, खाद्य प्रसंस्करण प्रकोष्ठ के चेयरमैन विकास चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल, राजकुमार भगत, सिद्धार्थ अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील कुमार अग्रवाल, अशोक लालवानी, अंशु जैन, चन्द्रमोहन खंडेलवाल, शुभम मित्तल, मनोज अग्रवाल और गौरव अरोरा सहित अनेक उद्यमी एवं उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor