खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बनेगा भारत की नई आर्थिक ताकत: आगरा में विशेषज्ञों ने बताया विकास और वैश्विक नेतृत्व का रोडमैप
आगरा। भारत को वैश्विक खाद्य महाशक्ति बनाने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की भूमिका को लेकर गुरुवार को आगरा में व्यापक मंथन हुआ। चैंबर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (सीएफपीआईए) द्वारा आयोजित विशेष सत्र में उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्यमियों ने एक स्वर में कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक शक्ति का नया इंजन बनेगा। कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं, निवेश अवसरों, कोल्ड चेन, ब्रांडिंग, गुणवत्ता मानकों और निर्यात संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
होटल होलीडे इन में आयोजित फूड प्रोसेसिंग उद्योग : विकास यात्रा एवं भविष्य का रोडमैप विषयक विशेष विचार मंथन सत्र का शुभारंभ संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार, चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, सीएफपीआईए अध्यक्ष राजकुमार भगत, कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी, आगरा व्यापार मंडल अध्यक्ष टी.एन. अग्रवाल, लघु उद्योग भारती के महासचिव राजीव बंसल, अनुज सिंघल, मनोनीत पार्षद अमित अग्रवाल पारुल, खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण विभाग के प्राचार्य लोकेश सेंगर, सीए आर.के. जैन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सुनील कुमार, नितिन अग्रवाल तथा आशीष गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
किसान, उपभोक्ता और उद्यमी के बीच सबसे मजबूत कड़ी है खाद्य प्रसंस्करण
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए सीएफपीआईए अध्यक्ष राजकुमार भगत ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसान, उपभोक्ता और उद्यमी के बीच सबसे महत्वपूर्ण सेतु है। यह क्षेत्र किसानों को बेहतर मूल्य, उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और उद्यमियों को रोजगार एवं निवेश के अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक खाद्य महाशक्ति बनाने की अपार क्षमता इस उद्योग में मौजूद है।
सरकारी योजनाएं उद्योग को दे रही नई उड़ान
खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण विभाग के प्राचार्य लोकेश सेंगर ने उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई योजना के तहत सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को 35 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा अधिकतम 10 लाख रुपये तक का पूंजीगत अनुदान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत 35 से 50 प्रतिशत तक तथा अधिकतम 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश में 14 आधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनमें आगरा के डौकी स्थित केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कोल्ड चेन और सौर ऊर्जा बढ़ाएंगे प्रतिस्पर्धा
उद्योग विशेषज्ञ सीए आर.के. जैन ने कहा कि यदि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कोल्ड चेन अवसंरचना से जोड़ा जाए तो उद्यमी 10 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं पर महिला उद्यमियों को 90 प्रतिशत तक तथा पुरुष उद्यमियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के अंतर्गत ब्याज में 6 प्रतिशत तक की छूट भी दी जा रही है।
वैश्विक पहचान बना सकता है आगरा का पेठा
लघु उद्योग भारती के महासचिव राजीव बंसल ने कहा कि आगरा का विश्वप्रसिद्ध पेठा आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा ब्रांड बन सकता है। इसके लिए गुणवत्ता, नवाचार और प्रभावी ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टी.एन. अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी विभाग उद्यमियों को जागरूक और सहयोग करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिससे व्यापारिक वातावरण अधिक अनुकूल बन रहा है।
‘एक जिला एक व्यंजन’ योजना से खुलेगा नया बाजार
संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने कहा कि "एक जिला एक उत्पाद" योजना की सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने "एक जिला एक व्यंजन" योजना शुरू की है। इसके माध्यम से स्थानीय खाद्य उत्पादों की पहचान, गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ और विपणन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने उद्यमियों से अधिकाधिक सुझाव देने का आह्वान किया ताकि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सके।
गुणवत्ता और मानकों से ही मिलेगा वैश्विक बाजार
चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि किसी भी उत्पाद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन सबसे आवश्यक है। खाद्य सुरक्षा विभाग के राजेश गुप्ता ने भी उद्यमियों को खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के प्रति जागरूक किया।
कर व्यवस्था और डिजिटल फूड कारोबार पर चर्चा
सीए निखिल गुप्ता ने खाद्य व्यवसाय से जुड़े कर ढांचे पर चर्चा करते हुए बताया कि रेस्टोरेंट में भोजन पर जहां 5 प्रतिशत कर लागू होता है, वहीं ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं पर अपेक्षाकृत अधिक कर भार देखने को मिलता है। उन्होंने संतुलित कर नीति की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाएगा फूड प्रोसेसिंग सेक्टर
कार्यक्रम के समापन पर कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकों के इस दौर में भी भोजन सबसे मूलभूत आवश्यकता है। भारत के पास दुनिया को गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता है और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ही देश को वैश्विक नेतृत्व दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में विकास चतुर्वेदी, आकाश चतुर्वेदी, सिद्धार्थ अग्रवाल, मोहित गर्ग, शैलेंद्र अग्रवाल, नितिन गोयल, राजेश कुमार अग्रवाल, संजय दीक्षित, पवन कुमार गुप्ता, मनीष सिंघल, अभिनव रस्तोगी, शशांक वर्मा, विवेक अग्रवाल, अभिषेक पोद्दार सहित बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि और उद्यमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाएं दिलीप कुमार, अपरार्क शर्मा और अनिल कुमार सविता ने संभालीं।