50 साल बाद गूंज रही गब्बर की चीख, ठाकुर दे रहा न्यायः इटली में बिना सेंसर के 'शोले'
फिल्म शोले के 50 वर्ष पूरे होने पर इसका अनकट और रिस्टोर्ड वर्ज़न पहली बार इटली के बोलोग्ना शहर में पुनर्जीवित सिनेमा महोत्सव (Cinema Ritrovato Festival) में दिखाया जा रहा है। इस वर्ज़न में दर्शक वह मूल दृश्य भी देख सकेंगे, जिसमें ठाकुर गब्बर को जूतों से कुचलकर मारता है। इस सीन को 1975 में सेंसर बोर्ड ने हटवा दिया था। फिल्म को 4K क्वालिटी में रीस्टोर किया गया है, जिससे 70एमएम के ओरिजिनल फॉर्मेट और ध्वनि के साथ 1975 जैसा अनुभव मिलेगा। इस प्रयास में सिप्पी फ़िल्म्स और फिल्म हेरिटेज फाउडेशन ने अहम भूमिका निभाई।
-चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार-
मथुरा। वर्ष 1975 में आई कालजयी फिल्म 'शोले' आपने देखी होगी। जिन्होंने न देखी हो, उन्होंने भी 'शोले' नाम तो जरूर सुना होगा। इस फिल्म को बने आज (27 जून 2025) को 50 वर्ष पूरे हो गये हैं।
'शोले' का क्लाइमेक्स गब्बर सिंह (अमजद खां) की अरेस्टिंग से होता है। उस समय 25 साल के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी ने फिल्म के अंत में ठाकुर (संजीव कुमार) के कील लगे जूतों से कुचलकर 'गब्बर की मौत कराई थी, लेकिन फिल्म सेंसर बोर्ड ने 'गब्बर को मौत की उस सजा' पर एतराज किया। बोर्ड ने माना कि गब्बर को फिल्म के अंत में मारने का मतलब 'कानून को अपने हाथ में लेना' है। अतः ये सीन हटा दिया गया।
बैंगलुरू के समीप फिर से अमजद खान, जय व वीरू आदि (अमिताभ बच्चन व धर्मेंद्र) को ले जाकर शूटिंग हुई और घायल गब्बर को अरेस्ट दिखाया गया।
अनकट शोल में बसंती (हेमा मालिनी) के गब्बर के सामने अंगारों पर नाचने का सीन सीन था। सेंसर बोर्ड ने इस पर भी आपत्ति जताई थी और बाद में इसमें बदलाव कर पहाड़ी पर कांच के टुकड़ों के बीच नाचने के रूप में दर्शाया गया। इसी प्रकार गब्बर द्वारा ठाकुर के दोनों हाथ काटते हुए सीन भी बोर्ड ने वीभत्स बताकर इसमें सुधार कराया था। इसके अलावा कई अन्य सीन काटे गये थे।
'शोले' के इतने सीन को हटाने की कसक रमेश सिप्पी को आज भी है। अब रमेश सिप्पी के बेटे ने पिता की कसक दूर करने को आज 27 जून 2025 को फिल्म के 50 साल पूरे होने के मौके पर इटली के शहर बोलोग्ना में ' शोले' को अनकट (हूबहू) विशाल परदे पर दिखवाने की व्यवस्था कराई है।
गब्बर 50 साल बाद 27 जून को आज इटली में ठाकुर के कील लगे जूतों से कुचल कर मारा जायेगा। ये अनकट एवं रिस्टोर्ड वर्ज़न इटली के शहर बोलोग्ना में प्रमुख ओपन-एयर स्क्रीनिंग के रूप में दिखाया जाएगा। यह शो सिनेमा रीत्रोवातो फेस्टिवल में खूबसूरत पियात्सा मज्जोरे में होने जा रहा है।
फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन और सिप्पी फिल्म्स की पहल से यह संभव हो रहा है। अब 4K में स्कैन की गई इस फिल्म को मूल 70एमएम, एस्पेक्ट रेशियो (2.2:1) में देखा जा सकेगा।
शोले फिल्म का मूल निगेटिव तो बर्बाद हो चुका था, लेकिन इंगलैंड के एक गोदाम में मिली कुछ रंगीन रील्स और वर्ष 1978 का इंटर पॉजिटिव सिप्पी फिल्म्स प्राइवेट कंपनी द्वारा सुरक्षित रखा गया था, जिससे इस फिल्म को एक नई ज़िंदगी मिली।
मूल साउंड निगेटिव और मैग्नेटिक ट्रैक से सुनायी देगा ताकि जय-वीरू की मस्ती, बसंती का धमधम नाच और गब्बर की डरावनी हंसी, सब कुछ वर्ष 1975 जैसे दिखेगा और सुनाई देगा।
संयोग से 'शोले' के निर्माता रमेश सिप्पी और हेमा मालिनी विगत 26 व 27 फरवरी 2025 को वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान स्थित उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद में आए थे। यहां वे नई फिल्म के लिए कलाकार चयन के लिए ऑडिशन में मैंने उनकी मदद की थी। (देखें चित्र)। इसे शोले की लोकप्रियता ही समझो, ऑडिशन के समय आये पत्रकारों ने इस फिल्म से जुड़े कई सवाल पूछे थे और सिप्पी ने सभी के जवाब दिए थे।