विशेष

दोहरी ज़ंजीरों में जकड़ी भारतीय महिलाएँ

महिला दिवस पर एक विचार--- _________ बृज खंडेलवाल द्वारा

प्यासी विरासत: आगरा की सूखी नदियां, ग़ायब होते तालाब, अ...

-बृज खंडेलवाल- आगरा,  जो कभी मुग़लिया सल्तनत की शान और ताजमहल की रूहानी खूबसू...

होली का रंग, पर्यावरण का संग: मस्ती न करें भंग

होली का त्योहार दस्तक दे रहा है। आगरा शहर समेत समूचा ब्रज मंडल रंगों के इस जश्न ...

आगरा में अवैध स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को सीमित करने की आ...

आगरा में एक तो खराब सड़कें। ऊपर से अवैध खोमचे, चाट पकौड़ी, फल सब्जी, कपड़े और जू...

गिरते मूल्य और बढ़ती बेशर्मी: समाज की नई तस्वीर

"नंगई" शब्द, जो पहले दिखावे और बेशर्मी का प्रतीक था, आज एक गंभीर चिंता का विषय ब...

महाकुंभ मेला: आध्यात्मिकता, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक ...

-बृज खंडेलवाल- विपक्षी नेता, वामपंथी चिन्तक, (HINA) यानी हिन्दू इन नेम ओनली व...

दो बच्चे और दो भाषा काफी हैं, तीसरी भाषा ‘विज्ञान’ की हो

  -बृज खंडेलवाल- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के पास तीन भाषा फॉर्मूले के...

ट्रंप के साहसिक कदम विकासशील देशों की बर्बादी का कारण ब...

एक के बाद एक ढेर सारे फरमानों और पहलों के जरिए अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ...

एक डरावना ख्वाब या हक़ीक़तः टाइम मशीन से ‘आगरा 2047’  की सैर

-बृज खंडेलवाल-  2047 के "विकसित भारत" में आगरा की क्या तस्वीर होगी? क्या ताज ...

भाषाई प्रदूषणः न अपनी भाषा में अच्छे, न अंग्रेजी सही से...

शैक्षणिक संस्थानों में भाषाई मानकों में चिंताजनक गिरावट आ रही है। यदि तत्काल कार...