भारत के कदम से पाकिस्तान और बांग्लादेश में हड़कंप, घबराई शहबाज शरीफ और मोहम्मद यूनुस सरकार
2026 से पहले तक में ईयू आने वाले भारतीय सामानों पर मोस्ट फेवर्ड नेशन टैरिफ दरें लगती थीं। एमएफएन टैरिफ स्टैंडर्ड, गैर-भेदभाव वाले शुल्क होते हैं जो वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देश एक-दूसरे पर लगाते हैं।
ढाका/इस्लामाबाद। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से पाकिस्तान और बांग्लादेश में खलबली मची हुई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने यूरोपीय संघ से जल्द फ्री ट्रेड डील करने का अनुरोध किया है। उन्होंने राजधानी ढाका में बांग्लादेश में यूरोपियन यूनियन के राजदूत माइकल मिलर और बांग्लादेश में यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की चेयरपर्सन नूरिया लोपेज से ढाका में मुलाकात की है। वहीं, पाकिस्तान के कारोबारी एक्सपर्ट्स ने शहबाज सरकार को यूरोप से जल्द समझौता नहीं होने पर टेक्सटाइल इंडस्ट्री में भूचाल आने की चेतावनी दी है।
ईयू-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से 2029 के बाद यूरोपीय बाजारों में पाकिस्तान और बांग्लादेश को मिलने वाली बढ़त खत्म हो जाएगी, जो दोनों देशों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। ये ट्रेड डील, दोनों देशों की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए घातक साबित हो सकती है। पाकिस्तान के मुख्य अखबार डॉन ने पाकिस्तानी ट्रेडिंग एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के हवाले से लिखा है कि "भारत ने अब एक आर्थिक मोर्चा खोल दिया है।"
पाकिस्तान और बांग्लादेश के निर्यातकों को दशकों से यूरोपीय बाजार में टैरिफ डिस्काउंट दिया गया है। यूरोपीय बाजार में पाकिस्तान को जनरलाइज़्ड स्कीम ऑफ़ प्रेफ़रेंस हासिल है, जबकि बांग्लादेश को एवरीथिंग बट आर्म्स का जबरदस्त फायदा मिला है। बांग्लादेश के कपड़े यूरोप में शून्य प्रतिशत टैरिफ पर बिकते हैं, जबकि पाकिस्तान को न्यूनतम शुल्क चुकाना पड़ता है। दोनों देशों को यूरोपीय बाजार में भारी भरकम कोटा और ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिला, खासकर टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के लिए, जो उनकी विदेशी कमाई का एक बड़ा हिस्सा है। लेकिन अब भारतीय टेक्सटाइल को भी शून्य प्रतिशत की छूट हासिल होगी। यानि पाकिस्तान और बांग्लादेश को दशकों से जो फायदा मिला है, वो खत्म हो जाएगा।
यूरोपीय यूनियन ने 2004 में पाकिस्तान के लिए छूट के साथ दरवाजे खोले थे। फिर 2012 में पाकिस्तान और EU ने पांच सालों के लिए इस योजना का विस्तार किया था। फिर 2014 में यूरोपीय यूनियन ने पाकिस्तान को जीएसपी प्लस का दर्जा दे दिया। इसका फायदा ये हुआ कि पाकिस्तान के करीब 85 प्रतिशत सामानों को शून्य प्रतिशत टैरिफ के साथ यूरोप में बेचने की इजाजत मिल गई।
इसका असर ये हुआ कि पाकिस्तान अपने कुल निर्यात का 20 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय बाजार में बेचता है। EU पाकिस्तान का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है, जो 2024 में पाकिस्तान के कुल व्यापार का 12.4% है, जबकि पाकिस्तान वस्तुओं के मामले में EU का 48वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। EU और पाकिस्तान के बीच वस्तुओं में द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 12 बिलियन पाउंड था।