बरेली में एमएसएमई समागम में उठे कर, शुल्क, आयात और उद्योग विकास से जुड़े मुद्देः व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्य़क्ष बोले- कोविड जैसी राहत योजनाओं पर फिर विचार कर सकती है सरकार
-आरके सिंह- बरेली। व्यापार, उद्योग, चिकित्सा, होटल, कृषि एवं सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं और सुझावों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित एमएसएमई समागम में उद्योग जगत की चुनौतियों पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने कहा कि कोविड काल में केंद्र सरकार ने व्यापारियों और उद्यमियों को राहत देने के लिए जिस प्रकार की ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में भी ऐसी योजनाओं पर विचार किया जा सकता है।
आईएमए सभागार में सोमवार देर शाम आयोजित एमएसएमई समागम को संबोधित करते हुए सुनील जे. सिंघी ने कहा कि उद्योग और व्यापार जगत ने सदैव ईमानदारी के साथ कार्य करते हुए करों का भुगतान किया है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग को कर भुगतान और पारदर्शिता को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए देशहित में योगदान जारी रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए ऐसे संवाद कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि समस्याएं हर क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन उनका समाधान टकराव नहीं बल्कि संवाद और सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। इसी सोच के साथ राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड देशभर के उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं को सुनकर उन्हें संबंधित स्तर तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
समागम के दौरान विभिन्न व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं और केंद्र तथा राज्य सरकार से उनके समाधान की मांग की। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने कहा कि कृषि क्षेत्र के बाद व्यापार और उद्योग सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र है। यदि इस क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक संकेत है कि भारत सरकार का प्रतिनिधि स्वयं उद्यमियों की समस्याएं सुन रहा है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने युवा उद्यमी विकास अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग विभाग को डेटाबेस आधारित कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता जताई कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सामग्री चीन से आयात होकर भारत में केवल असेंबल की जा रही है। यदि देश को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनाना है तो घरेलू उत्पादन और स्थानीय उद्योगों को अधिक प्रोत्साहन देना होगा।
सेंट्रल यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने छोटे होटल कारोबारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के बाद लगाए गए विभिन्न करों और कई विभागों द्वारा वसूले जा रहे दोहरे शुल्कों से व्यापारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भूजल उपयोग शुल्क, नगर निगम कर और अन्य विभागीय शुल्कों से जुड़े मामलों का सरलीकरण समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर इन समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
समागम में उपस्थित उद्यमियों ने उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र से जुड़े अनेक मुद्दों को उठाते हुए सरकार से व्यावहारिक और त्वरित समाधान की अपेक्षा जताई। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि सरकार और व्यापारिक समुदाय के बीच निरंतर संवाद ही आर्थिक विकास और उद्यमिता को नई दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।