जल, थल और नभ से सुरक्षित हो रही कांवड़ यात्रा, हाईटेक निगरानी से हर गतिविधि पर पल-पल नजर
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस वर्ष कांवड़ यात्रा को महाकुंभ जैसी सुरक्षा और तकनीकी निगरानी से जोड़ा गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए जल, थल और नभ से निगरानी की जा रही है। यात्रा मार्गों पर थल पर एटीएस, जल में जल पुलिस और नभ में हाईटेक ड्रोन तैनात हैं।
महाकुंभ जैसी सुरक्षा व्यवस्था में तब्दील हुई कांवड़ यात्रा, 29,454 सीसीटीवी और 395 ड्रोन से हो रही रियल टाइम निगरानी
पूरे कांवड़ मार्ग पर 29,454 सीसीटीवी कैमरे और 395 हाईटेक ड्रोन लगाए गए हैं, जो डीजीपी मुख्यालय स्थित मॉडर्न कंट्रोल रूम को रियल टाइम फीड भेज रहे हैं। टीथर्ड ड्रोन लंबे समय तक एक स्थान पर स्थिर रहकर भीड़ पर नजर बनाए रखते हैं, जबकि एंटी ड्रोन तकनीक किसी भी संदिग्ध ड्रोन गतिविधि को तुरंत निष्क्रिय कर देती है।
सोशल मीडिया सेल भी 24 घंटे एक्टिव
एक विशेष आठ सदस्यीय सोशल मीडिया टीम 24 घंटे अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं और आपत्तिजनक पोस्ट पर नजर रख रही है। ये टीम संवेदनशील पोस्ट पर तुरंत कार्रवाई कर रही है और संबंधित जिलों को समय रहते अलर्ट भेजा जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से आपत्तिजनक सामग्री हटवाने की प्रक्रिया भी जारी है।
बारकोड से श्रद्धालु जुड़ सकेंगे सीधे अधिकारियों से
श्रद्धालुओं की मदद के लिए ट्रैफिक डायवर्जन, आपात नंबर, पुलिस अधिकारियों की जानकारी और दिशा-निर्देशों को बारकोड के माध्यम से शेयर किया गया है। इस बारकोड को होर्डिंग, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाया गया है, जिससे किसी भी स्थिति में श्रद्धालु तुरंत संपर्क कर सकें।
रिकॉर्ड संख्या में सुरक्षा बल तैनात, राज्यवार समन्वय भी मजबूत
कांवड़ यात्रा को निर्बाध और सुरक्षित बनाने के लिए 587 राजपत्रित अधिकारी, 2,040 निरीक्षक, 13,520 उपनिरीक्षक, 39,965 आरक्षी, 1,486 महिला एसआई और 8,541 महिला आरक्षियों के साथ 50 कंपनियां पीएसी और 1,424 होमगार्ड तैनात हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के अधिकारियों का संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है ताकि रियल टाइम सूचना साझा हो सके।
एंटी ड्रोन और टीथर्ड ड्रोन: सुरक्षा के नए स्तंभ
एंटी ड्रोन सिस्टम रडार और सेंसर की मदद से दुश्मन या संदिग्ध ड्रोन को पकड़कर उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। डीआरडीओ का स्वदेशी D4S सिस्टम सॉफ्ट किल और हार्ड किल तकनीक दोनों से लैस है। वहीं टीथर्ड ड्रोन एक केबल से जुड़ा होता है, जो इसे हवा में स्थिर और लंबे समय तक निगरानी योग्य बनाता है। इसकी मदद से सुरक्षा बल संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी हवाई निगरानी कर रहे हैं।
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