श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ की भागवत कथा में कुंती स्तुति–भीष्म भक्ति से गूंजा मंडप, शिवपुराण कथा में सती चरित्र–पार्वती जन्म से दांपत्य धर्म का संदेश
आगरा में इन दिनों भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म की त्रिवेणी लगातार प्रवाहित हो रही है। शहर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और शिवमहापुराण कथा आयोजनों में श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आ रहे हैं। कहीं कुंती स्तुति और भीष्म भक्ति के प्रसंग से जीवन मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है तो कहीं सती चरित्र और पार्वती जन्म के माध्यम से दांपत्य जीवन में सम्मान, विश्वास और समर्पण का महत्व समझाया जा रहा है। यमुना तट से लेकर लोहा मंडी और जयपुर हाउस तक गूंज रहे हरिनाम संकीर्तन और शिव नाम जप ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया है। श्रद्धालु कथा श्रवण के साथ संस्कार, सेवा और भक्ति के भाव में निरंतर डूबे हुए हैं।
आगरा। यमुना तट स्थित ताज व्यू गार्डन फेस-1 पार्किंग क्षेत्र, यमुना किनारा रोड पर श्रीमनःकामेश्वर मंदिर मठ द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा मंडपम की दिव्य सज्जा, द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, कमल पर विराजमान श्रीनाथजी का स्वरूप तथा संध्या बेला में यमुना आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
कथा व्यास श्रीमहंत योगेश पुरी ने कुंती स्तुति, भीष्म भक्ति और शुकदेव प्राकट्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति का आधार ज्ञान नहीं, भाव है। उन्होंने कहा कि भगवान बाहरी वैभव नहीं, बल्कि निष्कपट श्रद्धा को स्वीकार करते हैं। उन्होंने भीष्म प्रसंग के माध्यम से बताया कि सच्ची भक्ति में भगवान स्वयं भक्त के वश में हो जाते हैं। कथा में परीक्षित जन्म, सृष्टि का विराट स्वरूप और धर्म–प्रकृति के रहस्यों का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
प्रातः बाल संस्कार शिविर में त्रिलोकी बंसल एवं उमेश बंसल ने योगाभ्यास कराया, गीता परिवार के राजीव गुप्ता पार्थ ने गीता पाठ कराया तथा अनामिका वर्मा ने एक्रेलिक आर्ट सिखाई। प्रतिदिन 250 से अधिक बच्चे संस्कार शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मठ प्रशासक हरिहर पुरी, सोनू गुप्ता, सीमा गुप्ता, सुमित मित्तल, उर्वशी मित्तल सहित अनेक यजमानों ने व्यास पूजन किया।
श्री शिवमहापुराण कथा में सती चरित्र का वर्णन

महाराजा अग्रसेन भवन में शिवमहापुराण कथा में सती चरित्र का वर्णन करते कथा व्यास मृदुल कांत शास्त्री।
आगरा के लोहा मंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में शिव परिवार संस्था द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के तृतीय दिवस पर सती चरित्र और पार्वती जन्म प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास मृदुल कांत शास्त्री ने कहा कि दांपत्य जीवन में सम्मान, विश्वास और समर्पण ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने शिव-पार्वती जीवन को गृहस्थ धर्म का आदर्श बताते हुए कहा कि यह जीवन संतुलन और कर्तव्य का संदेश देता है।
कथा में केंद्र राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य यजमान छोटेलाल बंसल और कांता बंसल ने व्यास पूजन किया। बुधवार को शिव-पार्वती विवाह महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। कथा स्थल सप्त शिवालय झांकियों और भक्ति संकीर्तन से गूंज उठा।
बुर्जीवाला मंदिर भागवत कथा में कुंती-भीष्म स्तुति प्रसंग

जयपुर हाउस स्थित श्री बुर्जीवाला मंदिर में भागवत कथा श्रवण करते श्रद्धालु एवं संकीर्तन में लीन भक्तजन।
जयपुर हाउस स्थित श्री बुर्जीवाला मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलाचरण और कुंती–भीष्म स्तुति प्रसंग सुनाया गया। कथाव्यास आचार्य राजेश शास्त्री ने कहा कि कर्म ही पूजा है और पुरुषार्थ से ही भगवत प्राप्ति संभव है। राजा परीक्षित प्रसंग के माध्यम से उन्होंने वैराग्य और भक्ति का संदेश दिया।
मुख्य यजमान गौरव बंसल और निधि बंसल रहे। कथा संयोजक शकुन बंसल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। बुधवार को सती, ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र का वर्णन होगा।