वृंदावन में बिहारी जी मंदिर के पास बड़ा हादसा: तेज आंधी के दौरान बंदरों की उछल-कूद से गिरा जर्जर छज्जा, छह श्रद्धालु घायल, मंदिर क्षेत्र में मची अफरा-तफरी
वृंदावन। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर के निकट मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया। मंदिर की गली नंबर पांच में स्थित एक पुराने और जर्जर मकान का छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं और दुकानदारों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में करीब आधा दर्जन श्रद्धालु घायल हो गए। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद मंदिर क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जबकि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

हादसे के बाद भगदड़ की स्थिति की तस्वीरें।
बंदरों की लड़ाई और तेज आंधी बनी हादसे की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ मौजूद थी। इसी दौरान मकान के पुराने और जर्जर छज्जे पर बंदरों की उछल-कूद और आपसी लड़ाई चल रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में तेज आंधी भी चल रही थी। अचानक छज्जा भरभराकर नीचे आ गिरा और उसके साथ ईंट, सीमेंट तथा कंक्रीट का मलबा गली में फैल गया।
श्रद्धालुओं पर गिरा मलबा, मची भगदड़
छज्जा गिरते ही गली में मौजूद श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद चीख-पुकार और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आसपास के दुकानदार और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े तथा मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए। घटना से क्षेत्र के दुकानदारों में भी दहशत का माहौल देखा गया।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। घायलों को एंबुलेंस की मदद से सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास के भवनों की स्थिति का भी जायजा लिया। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।
दो वर्ष पुरानी दर्दनाक त्रासदी की यादें हुईं ताजा
मंगलवार का हादसा दो वर्ष पहले बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में हुए उस दर्दनाक हादसे की यादें भी ताजा कर गया, जब एक पुराने भवन का छज्जा गिरने से कई श्रद्धालु घायल हो गए थे और कुछ लोगों की जान भी चली गई थी। उस घटना के बाद प्रशासन ने जर्जर भवनों का सर्वे कराया था, लेकिन मंगलवार की घटना ने उस सर्वे की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते खतरनाक भवनों की पहचान कर कार्रवाई की गई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
संकरी गलियां और पुराने भवन बने चुनौती
वृंदावन की संकरी गलियां, वर्षों पुराने भवन और प्रतिदिन उमड़ने वाली भारी श्रद्धालु भीड़ प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। विशेषकर त्योहारों, सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में मंदिर क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी जर्जर भवन का हिस्सा टूटना बड़ी जनहानि का कारण बन सकता है। बरसात का मौसम नजदीक होने से भवनों की मजबूती और सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
ये हैं हादसे में घायल हुए श्रद्धालु
हादसे में घायल हुए श्रद्धालुओं की पहचान लक्ष्मीनारायण (35) पुत्र शिशुपाल निवासी अलीगढ़, रुद्रांश (5) पुत्र विजय, विजय (35) पुत्र सतीश निवासी आगरा, उर्मिला देवी (70) पत्नी गोविंद लाल, चंचल प्रजापति (26) पुत्री ओमप्रकाश निवासी राजस्थान, जानकी देवी (48) पत्नी ओमप्रकाश, मेधा सैनी पुत्री जगवती तथा गोविंद (65) पुत्र खुशीलाल निवासी जनकपुरी, दिल्ली के रूप में हुई है। इसके अलावा आस्था भदौरिया (17) पुत्री मुकेश निवासी इटावा भी घायल हुई हैं। घायलों के परिजनों ने बताया कि हादसा मंदिर से लगभग 150 मीटर दूर हुआ।
सीओ बोले- किसी घायल की स्थिति गंभीर नहीं
क्षेत्राधिकारी सदर पीतम पाल सिंह ने बताया कि बांकेबिहारी मंदिर के गेट नंबर-4 के पास यह हादसा हुआ है। घटना में घायल हुए 6-7 श्रद्धालुओं को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कराया गया। फिलहाल किसी भी श्रद्धालु की स्थिति अत्यधिक गंभीर होने की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि सभी का इलाज जारी है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से घटना के बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही को कुछ समय के लिए रोका गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया।
डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुंचे
हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी सी.पी. सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की तथा घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही आसपास स्थित पुराने और जर्जर भवनों की स्थिति का भी आकलन किया गया, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।