वजीरपुरा में निकली 251 महिलाओं की मंगल कलश यात्रा, श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ
आगरा। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर वजीरपुरा स्थित प्राचीन सीताराम मंदिर सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। यहां आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा महोत्सव का शुभारंभ 251 महिलाओं की भव्य मंगल कलश यात्रा के साथ हुआ। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं के जत्थे, भजन-कीर्तन, शंखनाद और जयघोषों के बीच निकली यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कथा के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया।
मंदिर परिसर से वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजन-अर्चन के साथ कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा जज कंपाउंड एवं वजीरपुरा क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर परिसर पहुंची। मार्ग में अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और भगवान के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप : चैतन्य हरिचरत महाराज
कलश यात्रा के उपरांत कथा व्यास भागवताचार्य पूज्य श्री चैतन्य हरिचरत जी महाराज (गोवर्धन धाम) ने श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ करते हुए कथा माहात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप है। कलियुग में भागवत कथा ही ऐसा दिव्य साधन है जो मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के मार्ग पर अग्रसर करता है।
उन्होंने कहा कि कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन के विकार दूर होते हैं और ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा एवं समर्पण का भाव जागृत होता है। भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम है।
पुरुषोत्तम मास में कथा श्रवण का मिलता है अनेक गुना पुण्य
महाराज श्री ने कहा कि पुरुषोत्तम मास स्वयं भगवान श्रीहरि को समर्पित है। इस माह में किए गए जप, तप, दान और कथा श्रवण का पुण्य कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि यह कथा आयोजन पितरों की पुण्य स्मृति को समर्पित है। जब कथा, यज्ञ और सत्कर्मों का पुण्य अपने पितरों को अर्पित किया जाता है, तो यह उनके प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का सर्वोत्तम माध्यम बनता है।
उन्होंने कहा कि पितरों की कृपा से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
8 से 15 जून तक प्रतिदिन होगा कथा अमृत का रसपान
कार्यक्रम संयोजक मनीष अग्रवाल ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन 8 जून से 15 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 7 बजे तक किया जाएगा। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं, भक्त चरित्रों और आध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण कराया जाएगा।
अधिक से अधिक संख्या में कथा सुनने का आह्वान
प्राचीन सीताराम मंदिर के महंत अनंत उपाध्याय ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण जीवन को पवित्र और सार्थक बनाने का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा अमृत का लाभ लेने का आह्वान किया।
निरंजन लाल सारस्वत एवं आशा सारस्वत बने मुख्य यजमान
कथा महोत्सव के मुख्य यजमान निरंजन लाल सारस्वत एवं आशा सारस्वत हैं। आयोजन में सुजाता अग्रवाल, निर्मल, ममता, वंदना, राधिका, नीतू, आकांक्षा, भावना, नीलम, पूनम, सोनिया, सानू, सारिका, रेनू गोयल, शिप्रा, शिल्पी, अपूर्व मित्तल, विक्रम सिंह, अंबा प्रसाद गर्ग, अरुण गर्ग, मनोज गुप्ता, विनीत सिंघल, हनी, शेखर गोयल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।