भारत के पड़ोस में उत्तर कोरिया की एंट्री, म्यांमार को दी पनडुब्बी बनाने की तकनीक, बढ़ जाएगी म्यांमार की समुद्री ताकत
भारत का पड़ोसी देश म्यांमार उत्तर कोरिया की मदद से हमलावर पनडुब्बी का निर्माण कर रहा है। यह पनडुब्बी सांग ओ क्लास डिजाइन पर आधारित है। सांग ओ क्लास उत्तर कोरियाई नौसेना की रीढ़ मानी जाती है। उत्तर कोरिया और म्यांमार में पुराना सैन्य संबंध है। म्यांमार कई दशकों से उत्तर कोरियाई हथियार खरीदता है।
रंगून। भारत के पड़ोसी देश म्यांमार गृहयुद्ध के बीच स्वदेशी हमलावर पनडुब्बी का निर्माण कर रहा है। इसका खुलासा हाल में ही जारी एक सैटेलाइट तस्वीर से हुआ है। अनुमान है कि यह पनडुब्बी लगभग 40 मीटर लंबी है। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यांमार की यह पनडुब्बी काफी हद तक उत्तर कोरिया के सांग ओ क्लास डिजाइन पर आधारित लगती है। म्यांमार और उत्तर कोरिया के बीच रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास है। म्यांमार उत्तर कोरियाई हथियारों का पुराना खरीदार है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि म्यांमार की पनडुब्बी उत्तर कोरिया से मिली तकनीक पर आधारित है।
उत्तर कोरिया 1980 के दशक से ईरान को अटैक सबमरीन एक्सपोर्ट करता रहा है। इसके अलावा उसने कई विदेशी ग्राहकों को इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी दी है। उत्तर कोरिया की सबमरीन इंडस्ट्री ने सोवियत 'रोमियो' क्लास सबमरीन को घरेलू स्तर पर असेंबल करने से लेकर अपने खुद के एडवांस्ड युद्धपोत बनाने तक तरक्की की है। फिलहाल 'सांग-ओ' क्लास पनडुब्बी उत्तर कोरियाई नौसेना के बेड़े की रीढ़ है।
मिलिट्री वॉच मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, सांग-ओ क्लास सबमरीन भीड़-भाड़ वाले तटीय इलाकों में ऑपरेशन के लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार की गई हैं। यह पनडुब्बी दुश्मन के युद्धपोतों को आसानी से निशाना बना सकती है और उथले समुद्र में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकती है। हालांकि, अभी तक किसी संघर्ष के दौरान इसका प्रदर्शन नहीं देखा गया है, लेकिन उत्तर कोरिया का दावा है कि इस छोटी डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी ने नकली युद्ध अभ्यास (सिमुलेटेड एक्सरसाइज) में शानदार नतीजे दिए हैं।
उत्तर कोरिया का दावा है कि सांग-ओ क्लास सबमरीन ने सिमुलेटेड एक्सरसाइज में अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर और न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन को डुबाया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसे बनाने में कम लागत का लगना भी है। इस पनडुब्बी का इस्तेमाल संकरे समुद्री गलियारे में माइंस बिछाने और कई तरह के टॉरपीडो दागने के लिए किया जा सकता है। यह भी मुमकिन है कि म्यांमार में बन रही सबमरीन में क्रूज मिसाइलों के लिए 'वर्टिकल लॉन्च सेल' लगाए जाएं। यह एक ऐसी क्षमता है जिसे उत्तर कोरियाई सबमरीन डिजाइन में हाल ही में शामिल किया जाने लगा है।