बारामती में प्लेन क्रैशः महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की दुखद मौत, पायलट समेत चार अन्य का करुणांत, शोक की लहर
बारामती/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति पर आज शोक की काली छाया छा गई। बुधवार सुबह पुणे के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुए भीषण विमान हादसे में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित) के अध्यक्ष अजित पवार की दुखद मौत हो गई। विमान में बैठे अजित पवार के अलावा दो अन्य सहयोगियों, एक पायलट और एक क्रू सदस्य का भी इस हादसे में करुणांत हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक जुझारू जननेता, कुशल रणनीतिकार और जनआंदोलनों की पहचान रहे अजित पवार का यूं असमय चले जाना राजनीति और समाज, दोनों के लिए अपूरणीय क्षति है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजित पवार बुधवार सुबह लगभग 08 बजे मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ विमान में उनके निजी सुरक्षा गार्ड, एक पायलट और क्रू सदस्य मौजूद थे। कुल 5 लोग विमान में सवार थे- 3 यात्री, 1 पायलट और 1 क्रू मेंबर।

बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान अचानक विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते पूरा विमान धू-धू कर जलने लगा।
हादसे के बाद अजित पवार को गंभीर अवस्था में नजदीकी अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस दुर्घटना में विमान में सवार अन्य सुरक्षाकर्मी और क्रू सदस्य भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है।
परिवार और राजनीतिक जगत में शोक
हादसे की सूचना मिलते ही अजित पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले, पत्नी सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो गए। तीनों उस समय दिल्ली में शरद पवार के आवास पर एक साथ मौजूद थे।
अजित पवार को आज बारामती में जिला परिषद चुनाव के लिए चार चुनावी सभाओं को संबोधित करना था, लेकिन इस भयावह हादसे के बाद सभी कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिए गए हैं। पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर है, और राजनीतिक, सामाजिक संगठनों के साथ-साथ आम जनता नम आंखों से अपने नेता को याद कर रही है।
जांच और आपात कार्रवाई

दुर्घटना के तुरंत बाद प्रशासन, पुलिस और आपात सेवाएं मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने और घायलों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव कार्य किया गया। हादसे के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।