आगरा साहित्य समारोह में गूंजी देशभर की काव्यधारा: ‘गुर्गा मुर्गा लालित मोर’ का विमोचन, 150 से अधिक कवियों ने बांधा समां, स्व. इंद्रजीत सिंह भदौरिया की 98वीं जयंती पर साहित्य, संस्कार और सृजन का विराट संगम, साहित्य सरोज सम्मान से सम्मानित हुए तीन रचनाकार
आगरा। स्वर्गीय इंद्रजीत सिंह भदौरिया की 98वीं जयंती के अवसर पर संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में आयोजित तृतीय आगरा साहित्य समारोह-2026 साहित्य, संस्कृति और सृजनशीलता का उत्सव बन गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों, कवियों, समीक्षकों और बुद्धिजीवियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में एक ओर बाल साहित्य की नई कृति ‘गुर्गा मुर्गा लालित मोर’ का विमोचन हुआ, तो दूसरी ओर 150 से अधिक कवियों की काव्य रसधारा ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सरस्वती वंदना की प्रस्तुति कु. पूजा तोमर ने दी। समारोह के प्रथम सत्र में वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार हरीश कुमार सिंह भदौरिया के बाल काव्य संग्रह ‘गुर्गा मुर्गा लालित मोर’ का विमोचन मुख्य अतिथि अरुण डंग, भूप सिंह, हरिशंकर शर्मा बदन, प्रणीता प्रभात तथा अन्य अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता त्रिपुरा के बिलोनिया से पधारे साहित्यकार अभीक कुमार डे ने की।
इस अवसर पर हरीश कुमार सिंह भदौरिया ने कहा कि बच्चों और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के बिना राष्ट्र निर्माण की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति का आधार नई पीढ़ी होती है और उनमें अनुशासन, साहस, निष्ठा तथा कर्तव्यपरायणता जैसे गुणों का विकास बचपन से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माली अपने पौधों को विकसित होते देखकर प्रसन्न होता है, उसी प्रकार माता-पिता भी अपनी संतानों की सफलता पर गौरव का अनुभव करते हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और श्रेष्ठ संस्कार ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।
पुस्तक की समीक्षात्मक प्रस्तुति देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं मंच संचालक सुशील सरित ने कहा कि ‘गुर्गा मुर्गा लालित मोर’ बाल साहित्य की एक अत्यंत रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक कृति है। उन्होंने बताया कि पुस्तक को दो भागों में विभाजित किया गया है, जिसमें एक भाग प्राकृतिक वस्तुओं तथा दूसरा भाग कृत्रिम वस्तुओं पर आधारित बाल कविताओं का है। यह पुस्तक बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाने के साथ-साथ उनके ज्ञान और कल्पनाशक्ति का भी विस्तार करती है।
उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ बाल साहित्य वही होता है जो बाल मनोविज्ञान को समझते हुए बच्चों की संवेदनाओं और जिज्ञासाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करे। बच्चों के मन में उठने वाले प्रश्नों का सरल और सार्थक उत्तर देना समाज और अभिभावकों का दायित्व है तथा यह पुस्तक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
तीन साहित्यकारों को मिला ‘साहित्य सरोज’ सम्मान
समारोह में साहित्य सृजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तीन रचनाकारों को ‘साहित्य सरोज’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पहला पुरस्कार लखनऊ के नरेंद्र भूषण को उनकी पुस्तक ‘इंद्रधनुष कैसे उगे’ के लिए प्रदान किया गया। दूसरा पुरस्कार फिरोजाबाद के हरिशंकर शर्मा बदन को उनकी पुस्तक ‘प्रकृति प्रभा’ तथा तीसरा पुरस्कार अजमेर की पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ को उनकी कृति ‘अष्टावक्र गीता सार’ के लिए दिया गया। पुरस्कार स्वरूप क्रमशः तीन हजार, दो हजार और एक हजार रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की गई।
गौरतलब है कि यह सम्मान हरीश कुमार सिंह भदौरिया द्वारा अपने पिता स्वर्गीय इंद्रजीत सिंह भदौरिया की स्मृति में साहित्य के उत्थान और छंदबद्ध सृजन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है।
काव्य रसधारा में झलके प्रेम, संवेदना और जीवन दर्शन के रंग
समारोह के दूसरे सत्र में भव्य काव्य गोष्ठी एवं काव्य रसधारा का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर से आए लगभग 150 से अधिक कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। काव्यपाठ के दौरान श्रोताओं ने श्रृंगार, करुण, वीर, हास्य और दर्शन सहित विभिन्न रसों से परिपूर्ण रचनाओं का भरपूर आनंद लिया।
वरिष्ठ गीतकार श्रीपाल शर्मा ‘इदरीशपुरी’ (बागपत) ने प्रेम की भावनाओं को स्वर देते हुए अपनी पंक्तियां सुनाईं-
"प्यार पाया नहीं, प्यार पाकर तो देख,
मुझको तू अपना बनाकर तो देख।"
प्रणीता प्रभात (फरीदाबाद) ने पिता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा—
"मेहनत, मजदूरी, ताकत की परिभाषा हैं मेरे पिता,
मेरी जिंदगी की मशाल हैं मेरे पिता।"
डॉ. नेहा कौशिक (दिल्ली) ने जीवन की क्षणभंगुरता को अपनी रचना में उकेरा, जबकि तेज प्रकाश तेजस्वी (दौसा, राजस्थान) ने समय और जीवन के यथार्थ को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी।
आयोजन संयोजक हरीश कुमार सिंह भदौरिया ने भी अपनी मार्मिक पंक्तियों से श्रोताओं को भावुक कर दिया—
"जलवा फरोश हैं आज जिनकी वजह से हम,
वे जिंदगी की खुशियां मेरे नाम कर गए।"
देशभर के साहित्यकारों की रही सहभागिता
समारोह में फरीदाबाद, दिल्ली, जयपुर, बांदीकुई, शिवपुरी, सागर, उन्नाव, लखनऊ, देहरादून, नोएडा सहित देश के विभिन्न शहरों से साहित्यकारों ने भाग लिया। प्रमुख रूप से डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. अशोक अश्रु, रमा वर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, हरीश अग्रवाल ‘ढपोरशंख’, डॉ. असीम आनंद, डॉ. सुषमा सिंह, रमेश आनंद, उमाशंकर आचार्य, डॉ. यशोयश, नीरज स्वरूप सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि तरुण कुमार घोष (नोएडा) रहे तथा संचालन वरिष्ठ साहित्यकार सुशील सरित ने किया।