बकरीद बाजार पर सियासत और सख्ती की मार: बरेली की मंडियों से गायब हुए बंगाल-महाराष्ट्र के बड़े व्यापारी, देवचरा और रिठौरा मंडियों की रौनक फीकी, खुले में कुर्बानी पर सख्ती और महंगे बकरों का असर

-आरके सिंह- बरेली। बकरीद नजदीक आते ही रुहेलखंड की प्रसिद्ध बकरा मंडियों देवचरा और रिठौरा में हलचल तेज होने लगी है, लेकिन इस बार बाजार की तस्वीर पिछले वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। जहां कभी बकरीद से पंद्रह दिन पहले बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार के सैकड़ों व्यापारी मंडियों में डेरा डाल देते थे, वहीं इस बार बड़े व्यापारी और उनके एजेंट लगभग नदारद हैं। स्थानीय बकरा पालक एक-दो बकरे लेकर बाजार पहुंच रहे हैं और फुटकर खरीदारी शुरू हो गई है, लेकिन करोड़ों के कारोबार वाली मंडियों में वह पुरानी रौनक अब दिखाई नहीं दे रही।

May 22, 2026 - 13:05
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बकरीद बाजार पर सियासत और सख्ती की मार: बरेली की मंडियों से गायब हुए बंगाल-महाराष्ट्र के बड़े व्यापारी, देवचरा और रिठौरा मंडियों की रौनक फीकी, खुले में कुर्बानी पर सख्ती और महंगे बकरों का असर
बरेली की एक बकरा मंडी, जहां पिछले सालों जैसी रौनक नहीं दिख रही।

छोटे खरीदार कर रहे मोलभाव, महंगे बकरों से पीछे हट रहा मध्यमवर्ग

देवचरा और रिठौरा की मंडियों में इस समय छोटे और मध्यम दाम वाले बकरों की मांग अधिक बताई जा रही है। मध्यमवर्गीय ग्राहक बाजार में पहुंचकर जमकर मोलभाव कर रहे हैं। हालांकि बकरों के बढ़े दाम आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। मंडियों में सबसे छोटा बकरा भी दस हजार रुपये से शुरू हो रहा है। वहीं बाजार में बकरे का मीट करीब 800 रुपये किलो बिक रहा है, जिससे सामान्य वर्ग के लोग दूरी बनाने लगे हैं।

इस बार गांवों में नहीं पहुंचे बड़े व्यापारियों के एजेंट

देवचरा बाजार के मालिक राजेश सिंह ने बताया कि पिछले वर्षों में बकरीद से पहले बड़े व्यापारियों के एजेंट गांव-गांव जाकर बकरा पालकों से संपर्क करते थे और अच्छे दाम का लालच देकर माल खरीदते थे, लेकिन इस बार एजेंट दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष बकरीद से पहले बंगाल और महाराष्ट्र से करीब 500 व्यापारी यहां पहुंचते थे। प्रतिदिन चार ट्रक बकरे बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र भेजे जाते थे, लेकिन इस बार एक ट्रक भरने तक के लाले पड़े हुए हैं।

राजेश सिंह के अनुसार बकरीद से सात दिन पहले तक जहां पांच हजार बकरों की बिक्री हो जाती थी, वहीं इस बार एक हजार बकरे भी नहीं बिक पा रहे हैं।

बंगाल और महाराष्ट्र की सख्ती ने बदला व्यापार का गणित

राजेश सिंह ने बताया कि बंगाल और महाराष्ट्र के व्यापारियों से बातचीत में सामने आया कि वहां खुले में कुर्बानी को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। व्यापारियों का कहना है कि खुले स्थानों पर कुर्बानी नहीं होने दी जाएगी और घरों में जगह की कमी के कारण लोग बड़े पैमाने पर बकरे नहीं खरीद रहे हैं। पुलिस और केंद्रीय बलों की सक्रियता ने भी व्यापारियों में डर पैदा किया है।

ग्राहकों की मनोदशा देखकर माल नहीं खरीद रहे व्यापारी

बिहार के मधुबनी निवासी व्यापारी होशयार सिंह यादव ने कहा कि बंगाल और महाराष्ट्र में खुले में कुर्बानी पर सख्ती की खबरों के बाद व्यापारियों ने जोखिम उठाना कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई का डर बना हुआ है, जिससे व्यापारी पहले की तरह बड़े स्तर पर माल नहीं खरीद रहे।

मुर्गा पहली पसंद बन रहा, बकरे की मांग घटी

बंगाल के व्यापारी दादा मुखर्जी ने बताया कि वह हर साल रिठौरा मंडी से दस ट्रक बकरे खरीदते थे, लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं। उनके अनुसार बंगाल में लोग अब मुर्गे को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि कुर्बानी को लेकर असमंजस बना हुआ है और खरीदार कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बदले राजनीतिक माहौल ने बकरा व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।

राजस्थान के व्यापारियों को भी बड़ा घाटा

राजस्थान के दौसा निवासी बकरा व्यापारी नसीम उद्दीन ने बताया कि पहले वह बकरीद पर दस ट्रक माल बेच लेते थे, लेकिन इस बार मुश्किल से दो ट्रक बिकने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्राहक मौजूद हैं, लेकिन बकरे इतने महंगे हो चुके हैं कि आम आदमी पूछकर ही वापस लौट जा रहा है।

त्योहार से पहले बाजार में मायूसी

बकरीद से पहले जिन मंडियों में रातभर खरीदारों और व्यापारियों की भीड़ उमड़ती थी, वहां इस बार सन्नाटा और अनिश्चितता का माहौल दिखाई दे रहा है। व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार नजदीक आते-आते बाजार में कुछ तेजी आएगी, लेकिन फिलहाल हालात पिछले बीस वर्षों के मुकाबले सबसे कमजोर बताए जा रहे हैं।

SP_Singh AURGURU Editor