फ्रांस और अन्य देशों द्वारा फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता: वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़
फ्रांस ने अब आधिकारिक तौर पर फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे दी है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐलान करते हुए कहा कि यह कदम शांति और स्थिरता की दिशा में जरूरी है। इस घोषणा के साथ ही दुनिया के लगभग 155 देश फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे चुके हैं।
फ्रांस के इस निर्णय से पहले ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पुर्तगाल, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, माल्टा, मोनाको, एंडोरा, सैन मारीनो और आर्मेनिया जैसे देशों ने भी फिलिस्तीन को मान्यता दी थी।
मैक्रों ने कहा कि यह केवल फिलिस्तीन के अधिकारों को मान्यता देने का कदम है, इससे इज़राइल के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे हमास की हार बताया और शांति प्रक्रिया को मजबूत करने वाला कदम करार दिया।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसका विरोध किया और इसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। वहीं, फ्रांस के अंदर भी हालात शांत नहीं हैं। देश के 86 स्थानों पर फिलिस्तीनी झंडे फहराए गए, जिससे यहूदी समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस और अन्य पश्चिमी देशों की यह पहल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ है। यह कदम इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रयासों को प्रभावित कर सकता है और वैश्विक कूटनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है।