टीटीजेड में पीएम-10, बीओडी और ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ने से मंडराया पर्यावरणीय खतरा: ताज पीला पड़ रहा, यमुना दम तोड़ रही, रिवर कनेक्ट ने सरकार से मांगी तत्काल कार्रवाई
आगरा। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर रिवर कनेक्ट अभियान द्वारा जारी टीटीजेड पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट-2026 ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) की पर्यावरणीय स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण, घटते हरित आवरण तथा यमुना नदी के लगातार बिगड़ते हालात के कारण ताजमहल और यमुना दोनों अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं। अभियान ने सरकार के समक्ष ताज डाउनस्ट्रीम बैराज के निर्माण, यमुना पुनर्जीवन और रीयल-टाइम पर्यावरणीय निगरानी सहित तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर जारी रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग तीन दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद टीटीजेड क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। कोयला और कोक आधारित उद्योगों को स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए बाध्य किया गया तथा विशेष टीटीजेड प्राधिकरण का गठन हुआ। इससे शुरुआती वर्षों में वायु प्रदूषण में कमी भी आई, लेकिन बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या में वृद्धि, निर्माण गतिविधियों, कमजोर निगरानी व्यवस्था और यमुना प्रदूषण ने उस प्रगति को पीछे धकेल दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार आगरा में पीएम-10 का स्तर 198.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से तीन गुना अधिक है। वहीं पीएम-2.5 का स्तर भी मध्यम से खराब श्रेणी में बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि वाहन उत्सर्जन, डीजल जनरेटर, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और छोटे उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषण वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।
यमुना नदी की स्थिति को लेकर रिपोर्ट में और भी गंभीर तस्वीर सामने आई है। कई स्थानों पर जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर 40 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि मानक तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए। घुलित ऑक्सीजन का स्तर भी आवश्यक सीमा से नीचे दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना शोधित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के लगातार प्रवाह तथा नदी में घटते जलस्तर के कारण यमुना का पारिस्थितिक तंत्र गंभीर संकट में है। सूखते नदी तल से उड़ने वाली धूल ताजमहल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
रिपोर्ट में ध्वनि प्रदूषण को भी बड़ी चुनौती बताया गया है। धरोहर क्षेत्रों में शोर का स्तर 80 से 90 डेसिबल तक दर्ज किया गया, जबकि मानक 50 से 65 डेसिबल है। बढ़ते यातायात और पर्यटन गतिविधियों को इसका प्रमुख कारण माना गया है।
हरित आवरण में गिरावट पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि आगरा जिले में वन एवं वृक्ष आवरण बेहद कम है। ताज ट्रेपेजियम जोन में वन आवरण लगभग 3.4 प्रतिशत रह गया है, जबकि राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 33 प्रतिशत भाग वन और वृक्ष आवरण से आच्छादित होना चाहिए। वृक्षारोपण के बाद संरक्षण और रखरखाव की कमी भी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति का असर अब सीधे ताजमहल पर दिखाई देने लगा है। संगमरमर का पीला पड़ना, पत्थर के क्षरण की प्रक्रिया, यमुना से उठने वाली धूल, कीटों और शैवाल की बढ़ती समस्या ताजमहल की सुंदरता और संरचनात्मक सुरक्षा के लिए चुनौती बनती जा रही है।
रिवर कनेक्ट अभियान ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग नगला प्रेमा क्षेत्र में प्रस्तावित ताज डाउनस्ट्रीम बैराज का निर्माण अगले 12 महीनों के भीतर पूरा करने की है, जिससे यमुना में न्यूनतम जल प्रवाह बना रहे, नदी तल सूखने से रोका जा सके और ताजमहल की नींव की सुरक्षा मजबूत हो सके।
दूसरी मांग वर्ष 2028 तक यमुना में गिरने वाले सभी नालों का शत-प्रतिशत उपचार सुनिश्चित करने और यमुना पुनर्जीवन मिशन को समयबद्ध तरीके से लागू करने की है। तीसरी मांग वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए कम से कम 15 नए मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करने तथा रीयल-टाइम सार्वजनिक डैशबोर्ड विकसित करने की है।
रिवर कनेक्ट अभियान के संयोजक बृज खंडेलवाल ने कहा कि तीन दशक पहले सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों ने टीटीजेड को बचाने की मजबूत नींव रखी थी, लेकिन बढ़ते प्रदूषण और कमजोर प्रवर्तन के कारण वह नींव अब दरकने लगी है। उन्होंने कहा कि यमुना और ताज का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है तथा ताज डाउनस्ट्रीम बैराज, यमुना पुनर्जीवन और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं।
रिपोर्ट विमोचन कार्यक्रम में गोस्वामी नंदन श्रोतरीय, पंडित जुगल किशोर, अभिनव लाला, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, डॉ. हरेंद्र गुप्ता, डॉ. ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, पद्मिनी अय्यर, चतुर्भुज तिवारी, दिनेश शर्मा, मुकेश चौधरी, मीरा खंडेलवाल, शाहतोश गौतम, निधि पाठक और दीपक राजपूत सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
रिवर कनेक्ट अभियान ने केंद्र और राज्य सरकार, टीटीजेड प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि ताज ट्रेपेजियम जोन को राष्ट्रीय महत्व के पर्यावरणीय संरक्षण क्षेत्र के रूप में प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अभियान का स्पष्ट संदेश है- ताज बचाइए, यमुना बचाइए, भविष्य बचाइए और नदी बचेगी, तभी धरोहर बचेगी।