रूस परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में भारत की करेगा मदद, दोनों देशों में हुआ समझौता
भारत-रूस के बीच परमाणु ऊर्जा को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। रूस ने कहा है कि वह भारत में और ज्यादा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में मदद करेगा। इसे भारत-रूस संबंधों में एक नए अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इससे अमेरिका के चिढ़ने का खतरा भी जताया जा रहा है।
मॉस्को। रूसी सरकारी परमाणु निगम रोसाटॉम ने सोमवार को कहा कि भारत और रूस नई बड़ी और छोटी क्षमता वाली परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) परियोजनाएं विकसित करेंगे और परमाणु ईंधन चक्र में सहयोग करेंगे। यह समझौता रोसाटॉम के सीईओ एलेक्सी लिखाचेव और भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के प्रमुख अजीत कुमार मोहंती के बीच एक बैठक के दौरान हुआ। इसे भारत-रूस संबंधों में बड़ा विकास माना जा रहा है। हालांकि, इस समझौते से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भड़कने का भी खतरा है। ट्रंप पहले से ही रूस से तेल खरीद को लेकर भारत के खिलाफ अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा चुके हैं, जिससे यह 50% तक पहुंच चुका है।
रोसाटॉम ने एक बयान में कहा, "इस चर्चा में साझेदारी के विस्तार पर चर्चा हुई, जिसमें बड़ी और छोटी परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजनाओं का विकास और परमाणु ईंधन चक्र में सहयोग शामिल है। उपकरण निर्माण के स्थानीयकरण के अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया। बैठक में शामिल पक्षों ने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना के दौरान प्राप्त मूल्यवान अनुभव पर ध्यान दिया और भारत में नई प्रमुख परमाणु ऊर्जा पहलों को लागू करने की अपनी तत्परता पर जोर दिया।"
बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत में सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र और भारत-रूस तकनीकी एवं ऊर्जा सहयोग की एक प्रमुख परियोजना, कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की। यूनिट 1 और 2 को 2013 और 2016 में भारत के राष्ट्रीय पावर ग्रिड से जोड़ा गया था, जिससे देश के दक्षिणी क्षेत्र को बिजली मिल रही थी। यूनिट 3 में वर्तमान में प्री-स्टार्टअप ऑपरेशन चल रहे हैं, जिसमें एक खुले रिएक्टर पर सुरक्षा प्रणालियों का परीक्षण की तैयारी भी शामिल है।
ऐसी संभावना है कि इस समझौते का भारत-अमेरिका संबंधों पर कोई असर नहीं होगा। दरअसल यह एक असैन्य परमाणु समझौता है। भारत और रूस कई दशकों से परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण पर एक साथ काम कर रहे हैं। भारत ने रूसी मदद से कई परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण भी किया है। डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल की खरीद के कारण भारत से चिढ़े हुए हैं। उन्होंने परमाणु ऊर्जा पर दोनों देशों के बीच सहयोग पर अभी तक कुछ नहीं कहा है।