कामगारों को लिए सऊदी सरकार ने बनाए नए नियम, भारतीयों की होगी बल्ले-बल्ले!
नियमों में नियोक्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई है। वहीं कर्मचारियों से भी कुछ अपेक्षाएं रखी गई हैं। उन्हें काम के शेड्यूल का पालन करना होगा। जो काम सौंपा गया है, उसे लगन से करना होगा।
रियाद। सऊदी अरब की सरकार ने घरों, खेती और पशुपालन से जुड़े मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इससे उन्हें सैलरी, आराम और काम की अच्छी स्थिति मिलने में आसानी होगी। नए नियम कर्मचारियों को विस्तृत सुरक्षा देते हैं, जिसका मकसद उनके रोजगार में स्पष्टता और निष्पक्षता लाना है। नियमों में यह बदलाव भारतीयों के लिए ये स्पष्टतौर पर राहत की खबर है। सऊदी अरब में काम करने वाले विदेशियों में भारतीयों की बड़ी तादाद है। ऐसे में भारतीय कामगारों को सीधेतौर पर इसका फायदा मिलने जा रहा है।
सऊदी अरब के मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्री अहमद अल-राजही ने इन नए नियमों को मंजूरी दी है। ये नियम निजी घरों, खेतों और पशुओं के साथ काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा देते हैं। नए नियमों में कर्मचारियों को हर साल कम से कम 30 दिन का सवेतन वार्षिक अवकाश मिलेगा। किसी कर्मचारी का अनुबंध अवकाश से पहले समाप्त हो जाता है, तो उसे उसका पैसा मिलेगा।
काम के घंटों को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। अब कर्मचारी प्रतिदिन अधिकतम आठ घंटे ही काम करेंगे। कोई कर्मचारी लगातार पांच घंटे काम करता है तो उसे आराम और भोजन के लिए आधे घंटे का अनिवार्य ब्रेक मिलेगा। हर हफ्ते 24 घंटे का साप्ताहिक आराम अनिवार्य किया गया है। ओवरटाइम के लिए नए नियम में अतिरिक्त काम करने पर मूल वेतन का 50 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।
नियोक्ता 21 साल से कम उम्र के कर्मचारियों को काम पर नहीं रख सकेंगे। वे कर्मचारियों से उनके अनुबंध या पेशे के बाहर का काम नहीं करवा सकते हैं। साथ ही उन्हें किसी और के लिए या अपने निजी कामों के लिए काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। 90 दिनों के प्रोबेशन पीरियड की अनुमति दी गई है। इस दौरान कोई भी पक्ष बिना किसी मुआवजे के अनुबंध समाप्त कर सकता है।
नए नियमों में नियोक्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई हैं। अगर रहने की जगह काम से दूर है तो भोजन या उसका भत्ता और आने-जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था कंपनी करेगी। नियोक्ता वीजा, निवास परमिट या संबंधित प्रक्रियाओं के लिए कोई शुल्क नहीं ले सकेंगे। वे कर्मचारियों के पासपोर्ट या निजी सामान भी नहीं रख सकते हैं।
अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो नियोक्ता को उसके अंतिम संस्कार या शव को वापस भेजने का खर्च उठाना होगा। इसमें कर्मचारियों से भी समय का पाबंद रहते हुए अपना काम करने और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा करने की उम्मीद की गई है। नए नियमों से पेशेवर और सुरक्षित कामकाजी रिश्ता सुनिश्चित होगा।