आवास विकास परिषद की भूमि के कथित बैनामे में आगरा के बिल्डर मून गोयल की अग्रिम जमानत की याचिका सत्र न्यायालय से खारिज, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पेश न होने पर कोर्ट ने दिखाई सख्ती

आगरा। आवास विकास परिषद की बंधक भूमि के कथित फर्जी बैनामे और करोड़ों रुपये की जमीन के विवादित सौदों से जुड़े बहुचर्चित मामले में बिल्डर मून गोयल को बड़ा कानूनी झटका लगा है। आगरा के सत्र न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय के इस फैसले के बाद बिल्डर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

Jun 1, 2026 - 22:57
 0
आवास विकास परिषद की भूमि के कथित बैनामे में आगरा के बिल्डर मून गोयल की अग्रिम जमानत की याचिका सत्र न्यायालय से खारिज, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पेश न होने पर कोर्ट ने दिखाई सख्ती

आगरा। आवास विकास परिषद की बंधक भूमि के कथित फर्जी बैनामे और करोड़ों रुपये की जमीन के विवादित सौदों से जुड़े बहुचर्चित मामले में बिल्डर मून गोयल को बड़ा कानूनी झटका लगा है। आगरा के सत्र न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय के इस फैसले के बाद बिल्डर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

मामला आवास विकास परिषद की सिकंदरा योजना से एंथम से जुड़ी उस भूमि का है, जिसे परिषद के पास बंधक होने के बावजूद कथित रूप से परिवार के सदस्यों को बेचे जाने का आरोप है। आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के आवासों के लिए आरक्षित भूमि के संबंध में फर्जी बैनामे और अनियमित लेन-देन किए गए, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति विवादों में घिर गई।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुए पेश

सूत्रों के अनुसार, मामले में पूर्व में उच्च न्यायालय से कुछ अंतरिम राहत मिलने के बावजूद मून गोयल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित रूप से उपस्थित नहीं हुए। इसी तथ्य को न्यायालय ने गंभीरता से लिया और अग्रिम जमानत की मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

अदालत का सख्त संदेश

सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट संकेत दिया कि गंभीर आर्थिक अपराधों, भूमि विवादों और कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में केवल आशंकाओं के आधार पर अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

सरकारी भूमि और आवासीय योजनाओं से जुड़ा है मामला

बताया जा रहा है कि विवादित भूमि आवास विकास परिषद की योजनाओं से जुड़ी हुई है और उस पर परिषद का अधिकार एवं हित निहित था। इसके बावजूद भूमि के बैनामे और स्वामित्व हस्तांतरण को लेकर गंभीर प्रश्न उठे हैं। मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और लेन-देन भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा

अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब मून गोयल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उन्हें सीमित अवधि तक राहत प्राप्त हो सकती है, लेकिन सत्र न्यायालय के आदेश के बाद गिरफ्तारी की आशंका बलवती हो गई है। मामले पर अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।

भूमि घोटाले पर बढ़ी हलचल

आवास विकास परिषद की बंधक भूमि के कथित फर्जी बैनामे का यह मामला लंबे समय से चर्चा में है। न्यायालय के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर पूरे प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।