गुरु पूर्णिमा पर विशेषः आस्था, अध्यात्म और संत परंपरा की अनमोल धरोहर है आगरा, जहां ऋषियों की तपोभूमि आज भी जीवंत हैं

आगरा केवल ताजमहल का शहर नहीं, बल्कि ऋषियों, संतों, महंतों और आध्यात्मिक परंपराओं की समृद्ध धरोहर भी है। महर्षि अंगिरा, श्रंगी ऋषि, महर्षि परशुराम, सूरदास और वल्लभाचार्य की तपस्थलियों ने इस भूमि को विशेष धार्मिक महत्व प्रदान किया है। कैलाश महादेव, श्रीमनःकामेश्वर, बल्केश्वर, राजेश्वर, पृथ्वीनाथ और बटेश्वर जैसे प्राचीन तीर्थ आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। राधास्वामी मत और गायत्री परिवार जैसी विश्वव्यापी आध्यात्मिक धाराओं का उद्गम भी आगरा जनपद से हुआ। समय-समय पर मोरारी बापू, जगद्गुरु रामभद्राचार्य, अवधेशानंद गिरि, साध्वी ऋतंभरा, जया किशोरी, देवकी नंदन ठाकुर और अनेक संत-महात्माओं के आगमन ने आगरा की आध्यात्मिक पहचान को और अधिक समृद्ध एवं प्रतिष्ठित बनाया है।

Jul 29, 2026 - 13:11
Jul 29, 2026 - 13:21
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गुरु पूर्णिमा पर विशेषः आस्था, अध्यात्म और संत परंपरा की अनमोल धरोहर है आगरा, जहां ऋषियों की तपोभूमि आज भी जीवंत हैं
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आगरा। ऋषियों की परम पावन भूमि है आगरा, जिससे शहर की ही नहीं, देशवासियों की आस्था जुड़ी हुई है। पुराणों में भी इस शहर का जिक्र किया गया है, वहीं यहां जैसे तीर्थ आसपास के नगरों में भी नहीं है। संतों की साधना नगरी में समय-समय पर संतों का भी आगमन होता रहा है।

कल-कल निनाद करके अनंत काल से प्रवाहित हो रही यमुना के किनारे बसा यह शहर महर्षि अंगिरा के नाम पर भी है। अंगिरा ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र थे। लोहामंडी के खातीपाड़ा में उनका एकमात्र मंदिर है। रुनकता पर जहां महर्षि श्रंगी ऋषि का आश्रम है, श्रंगी ऋषि का विवाह भगवान श्रीराम की बहन शांता के साथ हुआ था। यहां सीताराम के मंदिर के साथ-साथ गोशाला है। श्रंगी ऋषि की दो मूर्तियां इस मंदिर में है।

रुनकता में ही महर्षि परशुराम, जमदग्नि ऋषि, माता रेणुका का मंदिर है। यहीं पर कामधेनु  गाय और कुबेर की प्राचीन मूर्तियां हैं। रुनकता पर ही सूर साधना स्थली है, जहां सूरदास की उनके गुरु बल्लभाचार्य से मुलाकात हुई थी और उन्होंने कृष्ण भक्ति में पदों के सृजन की प्रेरणा दी थी।

यमुना तट पर बसे इस शहर के यहां चारों कौनों पर प्राचीन शिवालय हैं-कैलाश महादेव मंदिर, बल्केश्वर महादेव मंदिर, राजेश्वर महादेव मंदिर और पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर। कैलाश मंदिर काफी प्राचीन है। बताया जाता है कि महर्षि परशुराम और उनके पिता महर्षि जमदग्नि ने दो शिवलिंग स्थापित किए। एक ही जलहरी में दो शिवलिंग के दर्शन बहुत कम होते हैं। इस मंदिर का पुराणों में भी उल्लेख है। यमुना तट पर स्थापित इस शिवालय का वातावरण बहुत ही सुरम्य है। यहां परदेस सहित कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है।

शहर के मध्य रावतपाड़ा में श्रीमनःकामेश्वर मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि मथुरा में बाल कृष्ण के दर्शन करके कैलाश पर्वत पर लौटते समय भगवान शंकर ने ही स्वयं इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इस शिवालय में 650 सालों से 11 अखंड दीपक प्रज्वलित हैं।

बाह के बटेश्वर जैसा तीर्थ स्थल भी शायद कहीं होगा। जहां यमुना के किनारे 101 शिव मंदिरों की अद्भुत श्रृंखला है। जहां वर्ष में कई बार मेले लगते हैं। बटेश्वर से तीन किलोमीटर दूरी पर शौरीपुर क्षेत्र हैं, जो भगवान श्री कृष्ण के चचेरे भाई और जैन धर्म के 22 वे तीर्थंकर नेमिनाथ की जन्मस्थली है। यहां  भगवान श्रीकृष्णके पूर्वजों ने राजधानी भी बनाई थी। यहां कोणार्क मंदिर की शैली में बना भगवान नेमिनाथ का मंदिर सभी के आकर्षण का केंद्र रहता है।

आगरा शहर से दो धाराएं निकलीं और देश-विदेश में अन्यतम स्थान बनाया। राधा स्वामी मत की शुरुआत पन्नी गली से हुई और अब देश-विदेश में भी इस मत के लाखों अनुयायी हैं। स्वामी बाग आगरा का प्रमुख स्मारक है, जो अब बहुत ही आकर्षक बन गया है। पर्यटकों के लिए भी प्रमुख केंद्र यह है। हजूरी भवन, पीपलमंडी में मत के आचार्य हजूर महाराज की समाधि है। जहां निरंतर सत्संग होता रहता है।

इसी प्रकार दूसरी प्रमुख धारा यहां से गायत्री परिवार की प्रवाहित हुई। आंवलखेड़ा में जन्मे आचार्य श्रीराम शर्मा ने हम बदलेंगे, जग बदलेगा के आव्हान के साथ गायत्री मंत्र को सिद्ध करके गायत्री तपोभूमि, शक्तिपीठ देश-विदेश में स्थापित कीं। उनके भी लाखों अनुयायी  हैं, जो समय-समय पर आंवलखेड़ा भी आते हैं। जिस प्रकार चार शिवालय चारों कौनों पर हैं, उसी प्रकार चारों कौनों पर चार मंदिर भैरोंजी के भी हैं। 

समय-समय पर पधारे हैं संत

इस भूमि पर समय-समय पर संतों काआगमन भी होता रहा है। भानुपीठाधीश्वर शंकराचार्य दिव्याानंद तीर्थ महाराज ने भी श्रीमद् भागवत कथा यहां की थी। विख्यात राम कथा वाचक मोरारी बापू की रामकथा भी यहां हुई है। चारों शंकराचार्य भी आते रहे हैं।रमणरेती के पीठाधीश्वर गुरुशरणानंद का समय-समय पर आगमन होता रहा है। संत विजय कौशल महाराज के जीवन की प्रथम कथा भी कोठीमीना बाजार में ही हुई थी। उसके बाद अब मंगलम परिवार द्वारा उनकी कथा का आयोजन समय-समय पर कराया जाता है।

जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी, विख्यात साध्वी ऋतंभरा, साध्वी आंनदमूर्ति गुरु मां,  कथावाचक मृदुल कृष्ण शास्त्री, कथा वाचक गौरव कृष्ण शास्त्री, कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर की कथाएं होती रही हैं। कथावाचकर जया किशोरी, कथावाचक चित्रलेखा, कथावाचक कृष्णचंद्र ठाकुर सहित  अनेक यहां कथा कर चुके हैं। हरि सत्संग समिति ने लगातार कई साल तक यहां कथाएं कराई हैं। कथावाचक चिन्मयानंद बापू की कथा भी प्रति वर्ष विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट की आगरा शाखा द्वारा कराई जाती है।

कोठी मीना बाजार में श्रीराम कथा श्रवण कराने आए थे देश के अद्भुत संत, राम भद्राचार्य महाराज, जो धर्मचक्रवर्ती, पदमविभूषण हैं। दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने 80 ग्रंथों की रचना की है

-आदर्श नंदन गुप्ता, ए-3,सीताराम कालोनी,बल्ंकेश्वर,आगरा। -मोबाइल 9837069255

SP_Singh AURGURU Editor