वन्यजीव अपराध पर सख्ती के साथ जागरूकता भी जरूरी: वाइल्डलाइफ एसओएस की कार्यशाला में न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह बोले- पुनर्वास और मार्गदर्शन अक्सर सजा से अधिक प्रभावी, वन्यजीव अपराध रोकने को संस्थागत समन्वय पर दिया जोर

मथुरा। वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, तस्करी नेटवर्क की कमर तोड़ने और अभियोजन प्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वाइल्डलाइफ एसओएस ने न्यायपालिका, उत्तर प्रदेश वन विभाग, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मथुरा में वन्यजीव अपराध और वन्यजीव अपराध से प्राप्त आय की जब्ती विषय पर तीसरी कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में न्यायपालिका, वन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया तथा वन्यजीव अपराधों की जांच, अभियोजन और रोकथाम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

Jun 6, 2026 - 17:56
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वन्यजीव अपराध पर सख्ती के साथ जागरूकता भी जरूरी: वाइल्डलाइफ एसओएस की कार्यशाला में न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह बोले- पुनर्वास और मार्गदर्शन अक्सर सजा से अधिक प्रभावी, वन्यजीव अपराध रोकने को संस्थागत समन्वय पर दिया जोर
वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा हिंदुस्तान कॉलेज में वन्यजीव अपराध और वन्यजीव अपराध से प्राप्त आय की जब्ती विषय पर शुक्रवार को आयोजित की गई तीसरी कार्यशाला में मौजूद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह और अन्य अतिथिगण।

हाथी संरक्षण केंद्र में मौजूद न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह और अन्य अतिथिगण।

कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने किया। इस अवसर पर आगरा और मथुरा मंडल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आगरा जोन के जिला वन अधिकारी तथा मथुरा जोन के जिला वन अधिकारी भी उपस्थित रहे।

वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए साझा रणनीति पर मंथन

एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य वन विभाग, न्यायपालिका, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों की जांच क्षमता, कानूनी समझ और आपसी समन्वय को मजबूत करना था। कार्यक्रम में वन्यजीव तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने, अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और अभियोजन की सफलता बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

विशेषज्ञों ने जांच तकनीकों, वन्यजीव अपराधों के आर्थिक पहलुओं, न्यायालयीन प्रक्रियाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।

जागरूकता और पुनर्वास सजा से अधिक प्रभावी

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से किए जा रहे कार्यों के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस की सराहना की। उन्होंने कहा कि कई बार जागरूकता, पुनर्वास और उचित मार्गदर्शन दंड की अपेक्षा अधिक स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।

उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के शोषण से जुड़े समुदायों को वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराना संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन की चर्चा करते हुए उन्होंने सभी जीवित प्राणियों की रक्षा को समाज का नैतिक दायित्व बताया।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की न्याय व्यवस्था का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होता है कि समाज के कमजोर और गरीब वर्ग स्वयं को कितना सुरक्षित महसूस करते हैं।

हाथियों की पीड़ा का किया उल्लेख

न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह ने वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में देखी गई एक नेत्रहीन हथनी की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और करुणा विकसित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों का स्मरण करते हुए सामाजिक विभाजनों से मुक्त समाज की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के उस विचार का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि अधिकार तभी सार्थक होते हैं जब लोगों को उनके बारे में जानकारी हो।

उन्होंने वाइल्डलाइफ एसओएस को करुणा, पुनर्वास, जागरूकता और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का उदाहरण बताया।

विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण अनुभव

कार्यशाला में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने संस्था के देशभर में संचालित अभियानों और प्रमुख मामलों से जुड़े अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक दीपक चौहान, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार शुक्ला, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय जांच एजेंसी के विशेष अभियोजक करमबीर सिंह नलवा, ज्योति सागर एंड एसोसिएट्स के पार्टनर कुमार किसलय, नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के विशेष अभियोजक विनय कुमार ओझा तथा कानूनी पत्रकार तरुण नांगिया ने भी अपने विचार रखे।

सामूहिक प्रयासों से ही सफल होगा संरक्षण

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि न्यायपालिका, प्रवर्तन एजेंसियों और संरक्षण विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर वन्यजीव अपराधों की जांच, अभियोजन और रोकथाम की सामूहिक क्षमता को मजबूत किया जा सकता है। इससे देश की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि संरक्षण तभी सफल होता है जब विभिन्न संस्थाएं मिलकर कार्य करें। ऐसे प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम वन्यजीव कानूनों, जांच प्रक्रियाओं और अभियोजन रणनीतियों की बेहतर समझ विकसित करते हैं।

समापन सत्र में दिया गया धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के समापन अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सत्य नारायण वशिष्ठ ने समापन संबोधन दिया। वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजू राज एम.वी. ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

SP_Singh AURGURU Editor