सूफी संतों का एक स्वर, ‘कौम में अमन’ के लिए देशव्यापी अभियान का ऐलान
नई दिल्ली। ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल की ओर से आज नई दिल्ली में “कौम में अमन के फरोग” विषय पर एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में देश में शांति, आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकजुटता को और मजबूत करने पर गहन मंथन किया गया। इसके बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में काउंसिल ने लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा की।
‘मेरा देश, मेरी पहचान’ के नारे के साथ सूफी काउंसिल का राष्ट्रीय शांति मिशन शुरू
नई दिल्ली। ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल की ओर से आज नई दिल्ली में “कौम में अमन के फरोग” विषय पर एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में देश में शांति, आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकजुटता को और मजबूत करने पर गहन मंथन किया गया। इसके बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में काउंसिल ने लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा की।
राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान की घोषणा
संवाददाता सम्मेलन में काउंसिल ने “मेरा देश, मेरी पहचान” नारे के तहत एक राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की। इस अभियान के माध्यम से देश के प्रत्येक राज्य और प्रमुख शहरों में जाकर शांति, संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश फैलाया जाएगा।
एनएसए अजीत डोभाल से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
प्रेस मीट से पूर्व ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व काउंसिल के चेयरमैन हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने किया, जो दरगाह अजमेर शरीफ के सज्जादा नशीन के उत्तराधिकारी हैं। बैठक में देश में शांति, एकता और समावेशी राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने में सूफी परंपरा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
हज़रत नसीरुद्दीन चिश्ती का संदेश
प्रेस को संबोधित करते हुए हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में शांति और राष्ट्रीय एकजुटता की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि धार्मिक नेतृत्व, सिविल सोसायटी, मीडिया और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सूफी परंपरा प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देती है, जो सदियों से भारत की बहुलतावादी संस्कृति की आधारशिला रही है और आज भी उग्रवाद के खिलाफ एक सशक्त वैचारिक शक्ति है।
उन्होंने दिल्ली में काउंसिल के मुख्यालय की स्थापना को सूफी संस्थानों और दरगाहों की एक साझा राष्ट्रीय आवाज करार दिया। साथ ही कहा कि भारत को आज वैश्विक मंच पर, विशेषकर मुस्लिम देशों में, सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। यह भारत में सभी धर्मों और समुदायों को समान सम्मान मिलने का प्रमाण है।
आज सूफीवाद की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा-अरशद फरीदी
दरगाह फतेहपुरी सीकरी, आगरा के सज्जादा नशीन एवं काउंसिल के उपाध्यक्ष अरशद फरीदी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सूफीवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सूफीवाद प्रेम, शांति, सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान का मार्ग दिखाता है, जो समाज में बढ़ती नफरत और विभाजन को समाप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अरशद फरीदी ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। बांग्लादेश में सूफियों और सूफी परंपरा से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या होने के बावजूद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
देशभर के सज्जादा नशीनों की मजबूत भागीदारी
इस प्रेस मीट में देशभर से आए 25 से अधिक प्रतिष्ठित सज्जादा नशीनों और सूफी विद्वानों ने भाग लिया और शांति, एकता तथा राष्ट्रीय सौहार्द के लिए अपने सामूहिक संकल्प को दोहराया।
इस मौके पर प्रमुख रूप से हज़रत सैयद फरीद अहमद निज़ामी (दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन), अली शाह (दरगाह कलियर शरीफ), नैयर मियां (दरगाह रादौली शरीफ, उत्तर प्रदेश), डॉ. हबीबुर्रहमान नियाज़ी (दरगाह, जयपुर), मुहतशिम अली (दरगाह अबुल्लाह, आगरा), अली ज़की हुसैनी (दरगाह गुलबर्गा), हज़रत सैयद अब्दुल क़ादिर क़ादरी, नेशनल कोऑर्डिनेटर, ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल, गुलाम नज्मी फारूकी, नेशनल सेक्रेटरी, ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल ने मीडिया जगत का आभार व्यक्त करते हुए अपील की कि वह शांति, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के संदेश को समाज तक पहुँचाने में अपनी सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाता रहे।