यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह बढा, प्रधान ही प्रशासक बनेंगे, यूपी में पहली बार यह व्यवस्था

यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। इसी के साथ प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान अब प्रशासक की भूमिका में आ जाएंगे। प्रदेश में पंचायत चुनाव समय में पर नहीं हो पाने से ऐसा करना पड़ा है। इससे पहले ऐसी स्थिति में एडीओ पंचायत को प्रशासक के तौर पर नियुक्ति मिलती रही है, लेकिन इस बार राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंप दी गई। प्रदेश में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा था।

May 25, 2026 - 22:11
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यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह बढा, प्रधान ही प्रशासक बनेंगे, यूपी में पहली बार यह व्यवस्था

लखनऊ। यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। अब प्रधान ही प्रशासक बनेंगे। सीएम योगी ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। मंगलवार से प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान अब छह महीने के लिए प्रशासक की भूमिका में आ जाएंगे। प्रदेश में पंचायत चुनाव समय में पर नहीं हो पाने की वजह से ऐसा करना पड़ा है। इससे पहले ऐसी स्थिति में सरकार एडीओ पंचायत को प्रशासक के तौर पर नियुक्त करती रही है। कहा जा रहा है कि सरकार ने गांवों में चलने वाली योजनाओं की गति को बनाए रखने के लिए प्रधानों को ही प्रशासक बनाने का फैसला किया। प्रदेश में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा था।
 
इस फैसले से ये भी साफ हो गया कि प्रदेश में पंचायत चुनाव विधानसभा इलेक्शन 2027 के बाद ही हो पाएंगे। प्रदेश के 27 हजार 694 ग्राम प्रधान हैं। सरकार ने पहली बार प्रधानों को चुनाव तक प्रशासक की जिम्मेदारी दी है। अब तक यूपी में एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन इस बार राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी सौंप दी गई। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ ने भी सरकार से यही मांग की थी। सामान्य स्थिति में अब तक पंचायत चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन हाईकोर्ट की प्रक्रिया और आयोग की रिपोर्ट के कारण इलेक्शन में करीब एक साल की देरी हो सकती है। चुनाव में देरी की एक वजह पंचायत मतदाता सूची का पूरी तरह से तैयार नहीं होना भी है।

पिछले दिनों योगी मंत्रिमंडल ने ओबीसी रिजर्वेशन फाइनल करने के लिए आयोग का गठन किया। आयोग छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इसकी अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राम अवतार सिंह के पास है। आयोग में दो रिटायर्ड जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को भी जगह दी गई है। आयोग नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद पंचायतों में ओबीसी आरक्षण का अंतिम फैसला लिया जाएगा। ओबीसी आयोग के गठन का निर्देश, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4 फरवरी 2025 को दिया था।