बदायूं में दर्दनाक हादसाः मेंथा टैंक में एक-एक कर उतरे तीन भाइयों में से दो की जहरीली गैस से मौत, तीसरे की हालत गंभीर
-आरके सिंह- बदायूं। जिले के फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र स्थित सुरैना पापड़ी गांव में मेंथा प्लांट के टैंक की सफाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि तीसरा भाई गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। बताया जा रहा है कि टैंक में जमा जहरीली गैस की चपेट में आने से तीनों भाई बेहोश हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां दो भाइयों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि तीसरे को गंभीर हालत में मुरादाबाद रेफर किया गया है।
मेंथा सीजन शुरू होने से पहले की जा रही थी सफाई
जानकारी के अनुसार सुरैना पापड़ी गांव में मेंथा सीजन शुरू होने से पहले प्लांट के टैंक की सफाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान सबसे पहले जयवीर टैंक के अंदर उतरा। काफी देर तक उनके बाहर न आने पर परिजनों और साथ मौजूद लोगों को चिंता हुई।
भाई को बचाने उतरे, खुद भी हो गए बेहोश
जयवीर के बाहर न निकलने पर उसका भाई राजेश उसे देखने और बाहर निकालने के लिए टैंक में उतर गया। जब राजेश भी वापस नहीं लौटा तो तीसरा भाई मनवीर टैंक के अंदर गया। टैंक में मौजूद जहरीली गैस के कारण तीनों भाई बेहोश होकर गिर पड़े।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने किसी तरह तीनों को टैंक से बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में दो भाइयों को मृत घोषित किया गया
अस्पताल में चिकित्सकों ने जयवीर और राजेश को मृत घोषित कर दिया। वहीं मनवीर की हालत अत्यंत गंभीर होने पर उसे बेहतर उपचार के लिए मुरादाबाद रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जहरीली गैस बनी मौत की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार बंद टैंकों, सेप्टिक टैंकों और औद्योगिक टैंकों में अक्सर हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं या फिर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाता है। ऐसे स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और गैस जांच के प्रवेश करना जानलेवा साबित हो सकता है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
देश के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार के कई हादसे सामने आ चुके हैं, जहां एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में अन्य लोग भी बिना सुरक्षा उपायों के टैंक या बंद स्थान में उतर गए और जहरीली गैस की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कार्यों के दौरान गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन जांच और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य होना चाहिए।
एक ही परिवार के दो भाइयों की मौत और तीसरे की गंभीर हालत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ ही मिनटों में खुशहाल परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।