25 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा इनामी बदमाश, एआई ने खोला राज, दिल्ली से दबोचा
आगरा पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से 25 साल से फरार 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी सैमुअल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने वर्षों तक नाम और ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश की, लेकिन पुराने फोटो को AI से अपडेट कर बनाई गई तस्वीर, ड्राइविंग लाइसेंस और ट्रैफिक चालानों ने उसकी असल पहचान उजागर कर दी। आरोपी लूट और युवती को भगाने के मामले में वांछित था।
आगरा। आगरा पुलिस ने तकनीक और लगातार मेहनत के दम पर एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है, जो पिछले 25 वर्षों से कानून की नजरों से बचता फिर रहा था। लूट और युवती को भगाने के मामले में वांछित 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी को आखिरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया।
इस गिरफ्तारी की सबसे खास बात यह रही कि आरोपी ने पिछले ढाई दशक में कई बार अपना नाम, पहचान और ठिकाना बदला, लेकिन आधुनिक तकनीक के सामने उसकी सारी चालाकियां बेकार साबित हो गईं।
25 साल पुरानी तस्वीर बनी सुराग
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास के अनुसार, थाना नाई की मंडी में दर्ज एक पुराने मुकदमे में आरोपी सैमुअल वर्ष 2002 से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पिछले छह महीनों से थाना नाई की मंडी पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने रिकॉर्ड से आरोपी की 25 साल पुरानी तस्वीर निकाली। इसके बाद AI तकनीक की मदद से उस तस्वीर को वर्तमान उम्र के अनुसार तैयार कराया गया, ताकि यह अंदाजा लगाया जा सके कि आज आरोपी कैसा दिखाई देता होगा।
एआई से बनी तस्वीर ने दिखाई नई राह
पुलिस ने एआई से तैयार की गई तस्वीर को विभिन्न डिजिटल रिकॉर्ड और डेटाबेस में मिलान के लिए लगाया। इसी दौरान एक ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो संदिग्ध रूप से आरोपी से मिलती-जुलती दिखाई दी। यह लाइसेंस ‘सहदेव सिंह यादव’ नाम से जारी किया गया था। पुलिस ने जब लाइसेंस की विस्तृत जानकारी जुटाई तो पता चला कि इस नाम से दिल्ली में एक कार के कई ट्रैफिक चालान दर्ज हैं।
कार की जानकारी से खुला सबसे बड़ा राज
पुलिस ने चालान में दर्ज कार नंबर की जांच की। जांच में जो तथ्य सामने आया, उसने पुलिस को भी चौंका दिया। जिस युवती को भगाने के मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज था, वही कार उसके नाम पर रजिस्टर्ड निकली। यहीं से पुलिस को यह विश्वास हो गया कि सहदेव सिंह यादव और फरार आरोपी सैमुअल एक ही व्यक्ति हैं।
दिल्ली में बिछाया जाल, फिर हुई गिरफ्तारी
पुख्ता सबूत मिलने के बाद नाई की मंडी पुलिस की एक टीम दिल्ली रवाना हुई। पुलिस ने आरोपी के पते के आसपास गुप्त निगरानी शुरू की। एक सिपाही को स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के लिए लगाया गया। कई दिनों की पड़ताल और पुष्टि के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह ही सैमुअल है और वर्षों से अलग-अलग नामों से रह रहा था।
असम से गुजरात और फिर दिल्ली तक बदलता रहा पहचान
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वर्ष 2002 में उसने आगरा में 1.75 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में उसके दो साथी गिरफ्तार हो गए थे, लेकिन वह फरार होने में सफल रहा।
पुलिस से बचने के लिए उसने सबसे पहले आगरा की संपत्ति बेच दी और उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर चला गया। कुछ समय वहां रहने के बाद वह गुजरात पहुंचा और फिर दिल्ली में आकर बस गया। इस दौरान उसने अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से पहचान बनाई। उसने अपने तीन नाम बताए सैमुअल, अमित मिश्रा और सहदेव यादव। दिल्ली में उसने सहदेव यादव के नाम से नई पहचान बनाई और इसी नाम से ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा लिया।
धर्म परिवर्तन की भी बताई कहानी
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसके पिता मूल रूप से असम के रहने वाले थे। बाद में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया था। इसी कारण उसकी पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर भी कई स्तरों पर भ्रम बना रहा।
टीम को मिलेगा इनाम
डीसीपी सिटी ने बताया कि इस जटिल और लंबे समय से लंबित मामले का सफल खुलासा करने वाली थाना नाई की मंडी के प्रभारी निरीक्षक रोहित कुमार और उनकी टीम को 10 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि अपराधी चाहे कितने भी वर्षों तक अपनी पहचान छिपाकर कानून से बचने की कोशिश करे, आधुनिक तकनीक और पुलिस की सतर्क जांच अंततः उसे कानून के दायरे में ले ही आती है।