क्या अमेरिका फिर बढ़ाएगा ब्याज दर? विलियम डडली के बयान से वैश्विक बाजारों में हलचल, फेड की जुलाई बैठक पर टिकीं दुनिया की नजरें
वॉशिंगटन। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की जुलाई के अंत में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक से पहले वैश्विक वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिका के पूर्व न्यूयॉर्क फेड अध्यक्ष विलियम डडली का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव और अर्थव्यवस्था की मजबूती मौजूदा स्तर पर बनी रहती है, तो फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की 28-29 जुलाई की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
मार्केटवॊच की एक रिपोर्ट के अनुसार डडली ने कहा कि फिलहाल फेडरल रिजर्व की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन जुलाई की बैठक को सामान्य बैठक मानना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है और यदि महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है तो केंद्रीय बैंक को सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने अपने विचार स्पष्ट करते हुए पूर्व फेड चेयरमैन विलियम मैकचेसनी मार्टिन के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख किया कि पार्टी जब सबसे अच्छी चल रही हो, तभी पंच बाउल हटाना पड़ता है। उनका आशय था कि अर्थव्यवस्था के अत्यधिक गर्म होने से पहले ही केंद्रीय बैंक को आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके।
इधर निवेशकों की नजरें फेड चेयर केविन वॉर्श की कांग्रेस में होने वाली गवाही पर भी टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि उनके बयान से आने वाली मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर कुछ संकेत मिल सकते हैं। हालांकि आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि वह ब्याज दरों को लेकर किसी स्पष्ट घोषणा से बच सकते हैं। इसके बावजूद वित्तीय बाजारों में जुलाई की बैठक में दरें बढ़ने की संभावना पहले की तुलना में अधिक मानी जा रही है।
फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने भी संकेत दिया है कि यदि इस सप्ताह जारी होने वाले महंगाई के आंकड़े अनुमान से अधिक आते हैं, तो ब्याज दर बढ़ाने का विकल्प मजबूत हो सकता है। उन्होंने कहा कि फेड का प्रमुख उद्देश्य महंगाई को 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक वापस लाना है और यदि मूल्य वृद्धि अपेक्षा से अधिक बनी रहती है तो आवश्यक सख्ती बरती जा सकती है।
हालांकि अर्थशास्त्रियों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है। मॉर्गन स्टेनली के मुख्य वैश्विक अर्थशास्त्री सेथ कारपेंटर का मानना है कि फेड जुलाई में ब्याज दर बढ़ाने की बजाय कुछ और आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर सकता है। उनके अनुसार हाल के बयानों के आधार पर बाजार ने संभावित निर्णय को लेकर कुछ अधिक आक्रामक अनुमान लगा लिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में लगातार बनी हुई महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत श्रम बाजार जैसे कारक फेड के फैसले को प्रभावित करेंगे। यही वजह है कि जुलाई के अंत में होने वाली एफओएमसी बैठक पर केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शेयर बाजार, बॉन्ड बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार की भी पैनी नजर बनी हुई है।