बच्चा तस्करी कांड की आरोपी महिला 10 महीने से छिपी थी आगरा में, डॉक्टर दंपत्ति की भूमिका भी जांच के घेरे में
फतेहाबाद के केके हॉस्पिटल बच्चा तस्करी मामले में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार मामले में वांछित एक महिला आरोपी पिछले करीब 10 महीनों से आगरा में एक डॉक्टर दंपत्ति के संरक्षण में रह रही थी। आरोपी पर बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त नेटवर्क को सुविधाजनक बनाने और धन लेने के आरोप हैं। उसकी अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। अब जांच एजेंसियां आरोपी को शरण देने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। यदि संरक्षण देने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।
आगरा। फतेहाबाद के चर्चित केके हॉस्पिटल बच्चा तस्करी प्रकरण में एक नया और अहम खुलासा सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले में वांछित एक महिला आरोपी पिछले करीब दस महीनों से आगरा शहर में रह रही थी। बताया जा रहा है कि उसे शहर की एक प्रतिष्ठित महिला चिकित्सक और उनके पति द्वारा संचालित अस्पताल परिसर से जुड़े स्थान पर शरण मिली हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी महिला का नाम उस नेटवर्क की जांच के दौरान सामने आया था, जिस पर नवजात और बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त को सुविधाजनक बनाने तथा इसके एवज में धनराशि लेने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह सुंदर सिंह समेत उन लोगों के संपर्क में थी, जिन पर बच्चों को बेचने और अवैध गोद दिलाने के संगठित नेटवर्क का हिस्सा होने के आरोप हैं।
मामले में अब तक 18 आरोपी गिरफ्तार होकर दिल्ली की जेल में बंद बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ अन्य संदिग्धों की तलाश अभी भी जारी है। इन्हीं में शामिल यह महिला आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर चल रही थी।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिला ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी राहत हासिल करने का प्रयास भी किया था। उसकी अग्रिम जमानत याचिका जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई थी। इसके बावजूद वह गिरफ्तारी से बचती रही। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस द्वारा उसके खिलाफ जारी वारंट कई बार उसके स्थायी पते पर चस्पा किए गए, लेकिन वह पुलिस की पहुंच से दूर बनी रही।
अब सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला पिछले कई महीनों से आगरा में रह रही थी। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों का फोकस उन लोगों पर भी केंद्रित हो गया है, जिन्होंने उसे कथित तौर पर आश्रय प्रदान किया। सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपी के खिलाफ दर्ज मुकदमे और उसकी वांछित स्थिति की जानकारी होने के बावजूद उसे संरक्षण दिया गया या गिरफ्तारी से बचाने में मदद की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
गांधीनगर क्षेत्र स्थित अस्पताल का संचालन करने वाले डॉक्टर दंपत्ति का नाम भी इसी संदर्भ में चर्चा में है। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने उनकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही उनके खिलाफ किसी कार्रवाई की पुष्टि हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जाएगा।
फिलहाल जांच एजेंसियां आरोपी महिला के संपर्कों, उसके संभावित ठिकानों, वित्तीय लेनदेन और उसे कथित तौर पर संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे बच्चा तस्करी नेटवर्क की परतें और खुल सकती हैं।