आगरा कॊलेज के सप्रू हॊस्टल में सजा किताबों का संसार, वक्ता बोले- इंटरनेट और एआई के दौर में भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं

आगरा। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते दौर में भी पुस्तकों की उपयोगिता कम नहीं हुई है। तकनीक सूचना उपलब्ध करा सकती है, लेकिन गहराई से पढ़ने, सोचने, समझने और तर्क विकसित करने के लिए पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है। आगरा में 21 साल बाद शुरू हुए दस दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन के अवसर पर आगरा कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ. पी. बी. झा ने नई पीढ़ी से पाठ्यक्रम से अलग प्रतिदिन कम से कम 15 पन्ने किसी अच्छी पुस्तक के पढ़ने की अपील की। सप्रू हॉस्टल परिसर, आगरा कॉलेज में 5 से 14 सितंबर तक आयोजित मेले में साहित्य, शिक्षा और ज्ञान की पुस्तकों का संसार पाठकों के लिए उपलब्ध रहेगा।

Sep 5, 2026 - 21:15
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आगरा कॊलेज के सप्रू हॊस्टल में सजा किताबों का संसार, वक्ता बोले- इंटरनेट और एआई के दौर में भी पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं
आगरा कॊलेज के सप्रू हॊस्टल में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन करते कॊलेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. पीबी झा। साथ हैं अन्य अतिथिगण।

21 साल बाद आगरा में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आगाज

समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली और पुस्तक मेला समिति (रजि.), नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन शनिवार को आगरा कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ. पी. बी. झा ने किया। उद्घाटन समारोह में आगरा कॉलेज के डॉ. वीके सिंह, डॉ. एके सिंह और डॉ. बीके चिकारा, समाजसेवी एवं लेखिका भावना वरदान शर्मा तथा अनुपमा दीक्षित सहित साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे।

बुके नहीं, बुक दीजिए’ का संदेश

समारोह में समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। साहित्य सरोवर के संचालक कशिश गोयल ने फूलों के बुके की जगह पुस्तक भेंट करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’ संदेश के साथ अतिथियों को भारतीय संविधान की प्रति भेंट की। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री डॉ. मनीषा गिरि ने किया।

हर दिन 15 पन्ने पढ़ने की आदत डालें

मुख्य अतिथि डॉ. पी. बी. झा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तकें केवल जानकारी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विचार, विवेक, तर्क और कल्पनाशीलता को विकसित करती हैं। इंटरनेट और एआई तेजी से सूचना उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन गहराई से पढ़ने, समझने और चिंतन करने की संस्कृति पुस्तकों से ही मजबूत होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से पाठ्यक्रम से अलग साहित्यिक, वैचारिक अथवा ज्ञानवर्धक पुस्तक के प्रतिदिन कम से कम 15 पन्ने पढ़ने की आदत विकसित करने को कहा।

555 पुस्तक मेलों का अनुभव साझा किया

प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने कहा कि डिजिटल युग में किताबें नहीं पढ़ी जा रहीं, यह धारणा सही नहीं है। समय इंडिया अब तक 15 राज्यों में 555 पुस्तक मेलों का आयोजन कर चुका है और अनुभव उत्साहजनक रहा है। आज भी पाठक अच्छी और उपयोगी पुस्तकों की तलाश में हैं, जरूरत उन्हें किताबों तक पहुंचाने की है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और बेहतर होगा, यदि हर पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी के हाथ में डंडे और बंदूक के साथ संविधान और अच्छी पुस्तक भी हो। हथियार व्यवस्था की रक्षा कर सकता है, लेकिन संविधान और पुस्तकें लोकतांत्रिक चेतना की रक्षा करती हैं। उन्होंने सामाजिक, शैक्षणिक और सरकारी समारोहों में फूलों के बुके के स्थान पर पुस्तक भेंट करने की संस्कृति विकसित करने की अपील की।

रविवार को लोकगीत और कवि सम्मेलन

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में रविवार, 6 सितंबर को शाम 4:30 बजे सभी आयु वर्गों के लिए लोकगीत एवं देशभक्ति गीत गायन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके बाद शाम 6 बजे स्थानीय कवि सम्मेलन होगा। आयोजकों ने आगरा के विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यप्रेमियों और आम नागरिकों से मेले में पहुंचकर पुस्तकें खरीदने और पुस्तक संस्कृति को मजबूत करने की अपील की है।

SP_Singh AURGURU Editor