बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, अपराधियों ने सिर में मारी गोली, यूनुस सरकार ने साधी चुप्पी
बांग्लादेश में हिंदू युवक राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह पिछले तीन हफ्तों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की पांचवीं घटना है। बांग्लादेश सरकार हिंदुओं के खिलाफ हमलों को सामान्य आपराधिक मामला बता रही है। हालांकि, इससे चुनावों से पहले बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
ढाका। बांग्लादेश में सोमवार को एक और हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह पिछले तीन हफ्ते में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की पांचवीं घटना है। इससे बांग्लादेश में चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया भी दी है। हालांकि, मोहम्मद यूनुस की सरकार इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा मानने से इनकार किया है और सामान्य आपराधिक घटना बताया है। बांग्लादेश 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं।
पत्रकार और ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी के अनुसार, मारे गए शख्स की पहचान राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है। बैरागी को कथित तौर पर दोपहर के आसपास जेस्सोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। हत्या के आसपास की परिस्थितियां अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, और पुलिस ने अभी तक गिरफ्तारी या संभावित मकसद के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह ताजा हत्या बांग्लादेश में हाल के हफ्तों में हिंदू समुदाय के सदस्यों से जुड़ी हिंसक घटनाओं के बीच हुई है, जिससे अल्पसंख्यकों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
31 दिसंबर को, शरियतपुर जिले के हिंदू व्यापारी खोकन दास पर उस समय भीड़ ने हमला कर दिया जब वे अपनी मेडिकल दुकान बंद करके घर लौट रहे थे। उन्हें चाकू मारा गया, पीटा गया और पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। खोकन दास ने बाद में ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने कहा है कि जांच जारी है, हालांकि अभी तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है।
वहीं, मेमनसिंह जिले के भालुका में एक कपड़ा कारखाने में काम करने वाले 27 वर्षीय हिंदू दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या थी। रिपोर्टों के अनुसार, 18 दिसंबर की रात को दास पर कारखाने के एक कार्यक्रम में इस्लाम के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद कट्टरपंथियों की एक बड़ी भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें पीटा, उनके कपड़े उतार दिए, एक पेड़ से लटका दिया और उनके शरीर को आग लगा दी।