बीएड अंकतालिका घोटाले का जिन्न फिर बाहर! पेज बदलने के आरोप में डॊ. आंबेडकर विश्वविद्यालय का बाबू निलंबित, पांच लाख रुपये लेने का दावा, 2008-09 के चार्ट से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच शुरू, रिकॉर्ड सील

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एक बार फिर बीएड अंकतालिका और चार्ट में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। बीएड सत्र 2008-09 के अंक चार्ट के पेज बदलने के गंभीर आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रधान सहायक एवं सत्यापन इंचार्ज शिव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलसचिव ने संबंधित अभिलेख सील कर दिए हैं और जांच समिति गठित कर दी है।

Jun 1, 2026 - 21:45
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बीएड अंकतालिका घोटाले का जिन्न फिर बाहर! पेज बदलने के आरोप में डॊ. आंबेडकर विश्वविद्यालय का बाबू निलंबित, पांच लाख रुपये लेने का दावा, 2008-09 के चार्ट से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच शुरू, रिकॉर्ड सील

बताया जा रहा है कि बरेली निवासी एक व्यक्ति ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव अजय मिश्रा को लिखित शिकायत भेजकर आरोप लगाया कि प्रधान सहायक शिव सिंह ने बीएड 2008-09 के अंक चार्ट में पेज बदलकर अभिलेखों में हेरफेर की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस छात्र के हित में यह बदलाव किया गया, उसके लिए कथित रूप से पांच लाख रुपये नकद लिए गए।

चार्ट के पन्ने बदलने का गंभीर आरोप

शिकायत में दावा किया गया है कि परीक्षा विभाग और चार्ट रूम में रखे गए मूल अभिलेखों के पन्नों से छेड़छाड़ की गई है। शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में शमसाबाद स्थित एनडी डिग्री कॉलेज तथा हाथरस के विजया डिग्री कॉलेज से संबंधित कुछ चार्टों के पन्नों की प्रतियां भी संलग्न की हैं।

आरोप है कि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में पन्ने बदलकर कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया।

कुलसचिव ने की त्वरित कार्रवाई

मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव अजय मिश्रा ने संबंधित चार्ट और अभिलेखों को सील करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रधान सहायक शिव सिंह को निलंबित कर दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति भी गठित कर दी है, जो रिकॉर्ड का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

दूसरी ओर निलंबित किए गए प्रधान सहायक शिव सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर फंसाने का प्रयास किया जा रहा है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

विश्वविद्यालय में अंकतालिकाओं और चार्टों में हेराफेरी के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। इससे पहले भी कई कर्मचारी और बाबू चार्ट में पेज बदलने तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ के मामलों में जेल जा चुके हैं।

विश्वविद्यालय के परीक्षा रिकॉर्ड, रोल नंबर जनरेशन और अंकतालिका संबंधी मामलों की जांच पूर्व में विशेष जांच दल (एसआईटी), सीबीसीआईडी और पुलिस द्वारा भी की जा चुकी है। जांच एजेंसियों ने कई मामलों में फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।

एसआईटी जांच में पकड़े गए थे फर्जी अभ्यर्थी

पूर्व की जांचों में एसआईटी ने बीएड से जुड़े कई ऐसे अभ्यर्थियों को चिह्नित किया था, जिनके रोल नंबर कथित रूप से रिकॉर्ड में बाद में जनरेट किए गए थे। जांच में ऐसे कई मामलों का खुलासा हुआ था, जिनमें संबंधित अभ्यर्थी शिक्षा विभाग में शिक्षक पदों पर कार्यरत पाए गए थे।

विश्वविद्यालय में फिर उठे रिकॉर्ड सुरक्षा पर सवाल

ताजा मामले ने एक बार फिर विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड संरक्षण, परीक्षा शाखा की कार्यप्रणाली और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक कर्मचारी की जवाबदेही का मामला नहीं होगा, बल्कि विश्वविद्यालय की पूरी अभिलेखीय प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और पूरे मामले पर शिक्षण एवं प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।