निस्वार्थ प्रेम में बंधे भगवान भी भूल जाते हैं अपनी ठकुराई: जया किशोरी ने भागवत कथा के विश्राम दिवस पर दिया प्रेम और भक्ति का संदेश

आगरा। रिश्ता कोई भी हो, यदि उसमें स्वार्थ है तो उसका कोई अर्थ नहीं। निस्वार्थ प्रेम ही सबसे बड़ा प्रेम है, जिसके वश में स्वयं भगवान भी भक्तों के प्रेम में बंध जाते हैं। प्रेम और भक्ति के इसी भावपूर्ण संदेश के साथ जया किशोरी ने श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित कथा के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा समाप्ति के बाद कथावाचक जया किशोरी के विदा होने पर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

Jul 29, 2026 - 21:47
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निस्वार्थ प्रेम में बंधे भगवान भी भूल जाते हैं अपनी ठकुराई: जया किशोरी ने भागवत कथा के विश्राम दिवस पर दिया प्रेम और भक्ति का संदेश
राजदेवम में बुधवार को श्रीमद भागवत कथा के विश्राम दिवस पर प्रेम और भक्ति का संदेश देतीं कथावाचक जया किशोरी।

व्यास पीठ से जया किशोरी ने कहा कि निस्वार्थ प्रेम वह शक्ति है, जिसके आगे संसार को चलाने वाले भगवान भी भक्तों के प्रेम में बंध जाते हैं। श्रीकृष्ण ने प्रेमवश अर्जुन का सारथी बनकर रथ चलाया और अपनी ठकुराई तक भूल गए। उन्होंने दुर्योधन के मेवा त्यागकर भक्त विदुर के घर साग ग्रहण किया। भजन “प्रेम वश पारथ रथ हाक्यो, भूल गए ठकुराई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई...” के माध्यम से उन्होंने प्रेम की महत्ता बताई।

जरासंध वध से राजा परीक्षित मोक्ष तक सुनाई कथा

श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर जया किशोरी ने जरासंध वध, श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह, सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित मोक्ष की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्मों का परिणाम अवश्य मिलता है। सुख और दुख दोनों कर्मों के आधार पर प्राप्त होते हैं। ईश्वर ने भी अपने कर्मों का हिसाब रखा और उसे भोगा। अच्छा समय मिले तो ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए और कठिन समय में नाम स्मरण करना चाहिए।

राजा परीक्षित मोक्ष की कथा के साथ भागवत कथा का समापन हुआ। इस दौरान पूरे पंडाल में “श्रीराधे” और “हरि बोल” के जयकारे गूंजते रहे।

लोग आज समाज के लिए नहीं सोच रहे

पूज्यश्री जया किशोरी ने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर चर्चा करते हुए कहा कि पहले चारों वर्ण कर्म के आधार पर निर्धारित होते थे और उनका उद्देश्य समाज सेवा होता था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण का कार्य समाज को शिक्षित करना, क्षत्रिय का कार्य रक्षा करना, वैश्य का कार्य पालन-पोषण और शूद्र का कार्य सेवा करना था। लेकिन वर्तमान समय में लोग केवल अपने हित के लिए कार्य कर रहे हैं, समाज के लिए सोचने की भावना कम होती जा रही है।

कथा विश्राम के बाद भी भक्ति का माहौल बना रहा। जया किशोरी द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।

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SP_Singh AURGURU Editor