गरीबों की जमीन घोटाले में घिरे बिल्डर मून गोयल पर फिर शिकंजा, कोर्ट से दोबारा एनबीडब्ल्यू की मांग

गरीबों की जमीन में कथित हेराफेरी के आरोपी बिल्डर मून गोयल के खिलाफ उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने सीजेएम कोर्ट में दोबारा गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की है। परिषद के अधिवक्ता कुलदीप दीक्षित का कहना है कि अग्रिम जमानत खारिज होने और पूर्व में जारी एनबीडब्ल्यू की तामील के बावजूद आरोपी अदालत में पेश नहीं हुआ। मामले में अब न्यायालय के आदेश का इंतजार है।

Jun 8, 2026 - 12:28
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गरीबों की जमीन घोटाले में घिरे बिल्डर मून गोयल पर फिर शिकंजा, कोर्ट से दोबारा एनबीडब्ल्यू की मांग

अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद भी नहीं हुए पेश, आवास विकास परिषद ने सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया प्रार्थना पत्र

आगरा। आगरा में गरीबों की जमीन में कथित हेराफेरी के मामले में आरोपी बिल्डर मून गोयल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की ओर से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर आरोपी के खिलाफ दोबारा गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करने की मांग की गई है।

आवास विकास परिषद के अधिवक्ता कुलदीप दीक्षित ने न्यायालय को अवगत कराया कि आरोपी मून गोयल को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली थी और जिला जज द्वारा उसका अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र भी खारिज किया जा चुका है। इसके बावजूद आरोपी निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ।

अधिवक्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि जनपद न्यायाधीश द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आरोपी को 6 जून तक संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण या उपस्थित होना था, लेकिन उसने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं, इससे पहले जारी गैर जमानती वारंट की तामील होने के बाद भी आरोपी अदालत में पेश नहीं हुआ।

प्रार्थना पत्र में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि आरोपी लगातार न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर रहा है, इसलिए उसके खिलाफ दोबारा गैर जमानती वारंट जारी कर गिरफ्तारी सुनिश्चित कराई जाए, ताकि वह कानून के समक्ष उपस्थित हो सके।

यह मामला गरीबों की जमीन में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें बिल्डर मून गोयल पहले से ही जांच और न्यायिक कार्रवाई का सामना कर रहा है। अब अदालत के समक्ष यह सवाल है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने के आरोपों को देखते हुए आरोपी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाए।

फिलहाल सीजेएम कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद न्यायालय के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। कानूनी हलकों में इस मामले को लेकर काफी चर्चा है और सभी की नजर अब अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई है।