सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता हटाए गए, ओएसएम विवाद पर केंद्र सरकार ने लिया बड़ा एक्शन, जांच के घेरे में पूरी मूल्यांकन व्यवस्था, ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया, ठेका आवंटन और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर उपजा था विवाद; जांच समिति गठित, और भी अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटा दिया है। बोर्ड की परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर लगातार उठ रहे सवालों, छात्रों के विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच यह कार्रवाई की गई है। साथ ही सरकार ने ओएसएम प्रक्रिया की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया है।

Jun 2, 2026 - 18:15
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सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता हटाए गए, ओएसएम विवाद पर केंद्र सरकार ने लिया बड़ा एक्शन, जांच के घेरे में पूरी मूल्यांकन व्यवस्था, ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया, ठेका आवंटन और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर उपजा था विवाद; जांच समिति गठित, और भी अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

सूत्रों के अनुसार जांच समिति विशेष रूप से इस बात की पड़ताल करेगी कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग व्यवस्था के संचालन के लिए जिस कंपनी को कार्य सौंपा गया था, वह निर्धारित मानकों और तकनीकी योग्यताओं पर खरी उतरती थी या नहीं। समिति ठेका प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, तकनीकी दक्षता और कार्य निष्पादन के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है और आगे और कार्रवाई संभव है।

दरअसल इस वर्ष सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कई विद्यार्थियों ने दावा किया कि पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका अवलोकन के दौरान प्रदर्शित प्रतियां उनकी वास्तविक लिखावट और उत्तर पुस्तिकाओं से मेल नहीं खा रही थीं। इसके अलावा वेबसाइट के बार-बार ठप होने, तकनीकी बाधाओं, पोर्टल की कार्यक्षमता और डेटा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं।

ओएसएम प्रक्रिया के विरोध में छात्रों और अभिभावकों ने सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न मंचों पर आवाज उठाई। मामला इतना बढ़ गया कि विपक्षी दलों ने भी इसे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार और सीबीएसई पर निशाना साधना शुरू कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है तथा ठेका प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय को स्थिति की समीक्षा करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि मंत्रालय स्तर पर कई दौर की बैठकों में छात्रों की शिकायतों, मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता, तकनीकी खामियों और ठेका आवंटन से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई। इसके बाद सरकार ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाते हुए चेयरमैन और सचिव को पद से हटाने का निर्णय लिया।

शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक परीक्षा या परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न बन गया है। यदि जांच में ठेका प्रक्रिया, तकनीकी संचालन या मूल्यांकन प्रणाली में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो इसका असर भविष्य की परीक्षा व्यवस्थाओं और डिजिटल मूल्यांकन मॉडल पर भी पड़ सकता है।

अब पूरे देश की निगाहें सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट न केवल ओएसएम विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी, बल्कि सीबीएसई की मूल्यांकन व्यवस्था, तकनीकी प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण निष्कर्ष दे सकती है।

SP_Singh AURGURU Editor