भारतीय क्षेत्र का नाम बदलने की कोशिश पर चीन को करारा जवाब,  कहा- ऐसी शरारतें स्वीकार नहीं,   नाम बदलने से सच्चाई नहीं बदलती

चीन द्वारा भारत के हिस्से की भूमि को मनगढ़ंत नाम देने को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने करारा जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन द्वारा भारत के हिस्से को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारतपूर्ण कोशिश को हम सिरे से खारिज करते हैं। चीन द्वारा झूठे दावे से इसकी वास्तविकता नहीं बदल जाएगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन की ये हरकतें भारत-चीन संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाती हैं. चीन को ऐसे कदमों से बचना चाहिए।

Apr 12, 2026 - 19:16
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भारतीय क्षेत्र का नाम बदलने की कोशिश पर चीन को करारा जवाब,  कहा- ऐसी शरारतें स्वीकार नहीं,   नाम बदलने से सच्चाई नहीं बदलती


नई दिल्ली। चीन की तरफ से स्थानों को मनगढ़ंत नाम दिए जाने के संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों को काल्पनिक नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को सख्ती से खारिज करता है।” उन्होंने कहा, “चीन की ओर से झूठे दावे पेश करने और बेबुनियाद कथाएं गढ़ने की कोशिशें इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकतीं कि ये सभी स्थान और क्षेत्र, जिनमें अरुणाचल प्रदेश भी शामिल है, पहले भी भारत का अभिन्न हिस्सा थे, आज भी हैं और हमेशा रहेंगे।” विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन की ये हरकतें भारत-चीन संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने केपर  प्रयासों को नुकसान पहुंचाती हैं। चीन को ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जो रिश्तों में नकारात्मकता लाते हैं और आपसी समझ को कमजोर करते हैं।

चीन की ये कार्रवाइयां भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के चल रहे प्रयासों को बाधित करती हैं। चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं।

चीन ने शातिराना चाल चलते हुए दिसंबर 2021 में भारत के 21 स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया। चीन इतना शातिर निकला कि अरुणाचल के 11 जिलों जिसमें तवांग से लेकर अंजॉ के स्टैंडर्ड नाम चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी कर दिया था। भारत ने तब चीन के इस कदम को अस्वीकार्य बताया और कहा था कि नए नाम रख देने से जमीनी सच्चाई नहीं बदल जाती। भारत ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।

इससे पहले 9 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार को तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास 'खेन्जेमाने' का दौरा किया था। वहां उन्होंने सैनिकों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने और हर समय मानसिक रूप से सतर्क रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

लोक भवन के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्गम इलाकों और कठोर मौसम के बीच स्थित यह सीमा चौकी भारत की सतर्कता और जुझारूपन का प्रतीक है। राज्यपाल की इस यात्रा को देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों के प्रति एकजुटता के एक सशक्त संकेत के रूप में देखा गया।