देवनागरी के कंठोष्ठ्य उत्सव में अभिभावकों के सम्मान का संदेश, कवियों की रचनाओं से सजी सांस्कृतिक संध्या
आगरा। संस्कृत और हिंदी भाषा के संवर्धन तथा शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, शिल्प और शैली के संरक्षण को समर्पित देवनागरी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, आगरा के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय अभिभावक दिवस के अवसर पर आयोजित हृदयंगम्-101 के अंतर्गत कंठोष्ठ्य उत्सव साहित्य, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का अनुपम संगम बन गया। ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित संघ भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों, अधिवक्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने भाग लेकर अभिभावकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि डॉ. राजेन्द्र मिलन ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की प्रगति और व्यक्तित्व निर्माण के वास्तविक संवाहक अभिभावक होते हैं। उन्होंने कहा कि केवल माता-पिता ही अभिभावक नहीं होते, बल्कि जो व्यक्ति जीवन में संस्कार, शिक्षा और मार्गदर्शन देता है, वह भी अभिभावक की भूमिका निभाता है। दादा-दादी, गुरुजन और परिवार के सभी बड़े-बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर और सच्चे अभिभावक हैं।
बड़ों का सम्मान ही स्वयं का सम्मान : नंदनंदन गर्ग
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कार भारती ब्रज प्रांत के महामंत्री नंदनंदन गर्ग ने कहा कि अपने से बड़े सभी व्यक्ति किसी न किसी रूप में हमारे अभिभावक होते हैं। उनका सम्मान करना वास्तव में स्वयं के संस्कारों और व्यक्तित्व का सम्मान करना है। उन्होंने युवाओं से पारिवारिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
अभिभावक जीवन की ऊर्जा के स्रोत : नरेन्द्र शर्मा
मुख्य वक्ता नरेन्द्र शर्मा एडवोकेट ने कहा कि अभिभावक हमारे दैनिक जीवन में ऊर्जा, प्रेरणा और आत्मविश्वास के स्रोत होते हैं। उनके मार्गदर्शन से ही व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अमिता त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि माता-पिता हमारा भाग्य होते हैं, जबकि अभिभावक हमारे सौभाग्य का प्रतीक हैं। जीवन में सही दिशा और प्रेरणा देने वाले सभी लोग सम्मान और आदर के पात्र हैं।
बाल कवयित्रियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। बाल कवयित्री तनिष्का शर्मा और गार्गी शर्मा ने अपनी मधुर एवं कोकिल कंठ स्वर लहरियों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।
कंठोष्ठ्य उत्सव का संचालन कवि डॉ. यशोयश ने प्रभावशाली शैली में किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संजय कुमार एडवोकेट ने प्रस्तुत किया।
काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों में डॉ. शेषपाल सिंह 'शेष', कवि डॉ. यशोयश, उमाशंकर पाराशर, डॉ. महेश गोपाली, संजय कुमार एडवोकेट, अशोक कुमार शर्मा, सौरभ कुमार वर्मा, राकेश कुमार शर्मा, डॉ. रामेन्द्र शर्मा, रवि भारत सिंह एडवोकेट, पवन दिवाकर तथा विवेक कुमार वार्ष्णेय सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय अभिभावक दिवस की भावना को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों के महत्व, पारिवारिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। साहित्य और संस्कृति के इस उत्सव ने उपस्थित लोगों को अभिभावकों के प्रति सम्मान, समर्पण और कृतज्ञता का संदेश दिया।